नासिक के TCS BPO में हुए कथित उत्पीड़न और धार्मिक जबरदस्ती के मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। जहाँ एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई तेज कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इस केस की मुख्य आरोपियों में से एक, निदा खान (Nida Khan) के परिवार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। इस पूरे विवाद ने न केवल कॉर्पोरेट कल्चर पर सवाल उठाए हैं, बल्कि एक मध्यमवर्गीय परिवार की प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगा दिया है।
"बेहतर होता अगर वह काम ही न करती": पिता का बयान
निदा खान के पिता, जो नासिक में लकड़ी का व्यवसाय चलाते हैं, आज अपनी बेटी की स्थिति देखकर टूट चुके हैं। Hindustan Times से बात करते हुए उन्होंने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने कहा, "एक समय था जब मुझे गर्व था कि मेरी बेटी एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में नौकरी कर रही है, लेकिन आज मुझे उसे काम करने के लिए प्रोत्साहित करने पर पछतावा हो रहा है।"
उनके अनुसार, निदा एक सामान्य लड़की है जो केवल अपने काम से मतलब रखती थी। पिता का दावा है कि निदा के बारे में जो बातें कही जा रही हैं, उनमें से कोई भी सच नहीं है। "वह बस रोज काम पर जाती थी और लोगों को ‘हाय और बाय’ कहती थी, शायद इसी वजह से वह इस मुसीबत में फंस गई है।"
फरार या साजिश
? परिवार और वकील का पक्ष
पुलिस का दावा है कि निदा खान फिलहाल फरार हैं, लेकिन परिवार की कहानी कुछ और ही है। निदा के मामा ने बताया कि वह कहीं भाग नहीं रही हैं।
मुंबई शिफ्ट: जनवरी में शादी के बाद निदा मुंबई के मालाड स्थित कंपनी के ऑफिस में ट्रांसफर हो गई थीं।
निलंबन (
Suspension): 9 अप्रैल को उन्हें निलंबित किए जाने तक वह काम कर रही थीं।
पुलिस जांच: परिवार का आरोप है कि अब तक कोई भी पुलिस अधिकारी उनके घर पूछताछ के लिए नहीं आया है।
निदा के वकील, बाबा सैयद ने स्पष्ट किया है कि वे नासिक के सेशंस कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया में हैं।
TCS का बड़ा बयान: "निदा खान HR मैनेजर नहीं थीं"
इस मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के आधिकारिक बयान से आया है। मीडिया रिपोर्ट्स में लगातार निदा खान को 'HR मैनेजर' बताया जा रहा था, लेकिन कंपनी के सीईओ और एमडी के. कृतिवासन ने स्थिति साफ कर दी है।
पद को लेकर स्पष्टता, कंपनी ने स्पष्ट किया कि निदा खान:
Process Associate थीं: वह कंपनी में एक 'प्रोसेस एसोसिएट' के रूप में कार्यरत थीं।

कोई लीडरशिप रोल नहीं: उनके पास भर्ती (Recruitment) या किसी भी तरह की लीडरशिप जिम्मेदारी नहीं थी।
HR विभाग से ताल्लुक नहीं: उनका एचआर मैनेजर होना पूरी तरह से गलत तथ्य है। TCS ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया है।
स्वतंत्र जांच: कंपनी ने निष्पक्ष जांच के लिए Deloitte और लॉ फर्म Trilegal की सेवाएं ली हैं।
निगरानी समिति: इस कमेटी की अध्यक्षता स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री कर रहे हैं।
आरती सुब्रमण्यन का नेतृत्व: कंपनी की प्रेसिडेंट और सीओओ आरती सुब्रमण्यन आंतरिक जांच का नेतृत्व कर रही हैं।
क्या है पूरा नासिक
TCS मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब नासिक पुलिस ने एक 23 वर्षीय महिला कर्मचारी की शिकायत पर FIR दर्ज की। शिकायतकर्ता ने अपने सीनियर सहकर्मी दानिश शेख पर गंभीर आरोप लगाए।
FIR में दर्ज मुख्य आरोप:
यौन शोषण: पीड़िता का आरोप है कि दानिश ने शादी का झूठा वादा करके उसका शोषण किया और यह छिपाया कि वह पहले से शादीशुदा है।
धार्मिक उत्पीड़न: शिकायत में कहा गया है कि दानिश और एक अन्य सहकर्मी तौसीफ ने उसे इस्लाम की खूबियां बताकर धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने की कोशिश की।
निदा खान की भूमिका: 26 मार्च को दर्ज FIR के अनुसार, निदा खान पर एक हिंदू देवता के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। इसके अलावा उन पर यौन उत्पीड़न का कोई सीधा आरोप नहीं है।
पुलिस कार्रवाई की वर्तमान स्थिति:
पुलिस ने कुल 8 आरोपियों में से 7 को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 75 और 299 के तहत केस दर्ज किया गया है।
कॉर्पोरेट जगत के लिए क्या हैं इसके मायने
?
नासिक की इस घटना ने 'Workplace Safety' और 'Internal Ethics' पर नई बहस छेड़ दी है। अक्सर ऐसी खबरों से कंपनी की साख पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि, TCS ने साफ किया है कि नासिक यूनिट बंद होने की खबरें झूठी हैं और कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है।
वर्कप्लेस पर अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें
?
POSH Policy: हर MNC में 'Prevention of Sexual Harassment' (POSH) कमेटी होती है। अगर आपको किसी भी तरह का उत्पीड़न महसूस हो, तो तुरंत वहां रिपोर्ट करें।
Documentation: अगर कोई आपको धार्मिक या व्यक्तिगत रूप से परेशान कर रहा है, तो उसके चैट्स या रिकॉर्डिंग्स को सुरक्षित रखें।
HR से संपर्क: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने रिपोर्टिंग मैनेजर या HR को दें (भले ही इस मामले में आरोपी के पद को लेकर भ्रम था, लेकिन सिस्टम पर भरोसा रखें)।
किसी भी कॉर्पोरेट विवाद में फंसने पर हमेशा अपनी कम्युनिकेशन हिस्ट्री (Emails/Chats) का बैकअप रखें और कानूनी सलाह लेने में देरी न करें।
नासिक का TCS मामला अब एक कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। जहाँ एक तरफ पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं निदा खान का परिवार इसे एक बड़ी साजिश करार दे रहा है। सच क्या है, यह तो कोर्ट और पुलिस की जांच के बाद ही साफ होगा। लेकिन इस घटना ने यह जरूर साबित कर दिया है कि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में 'प्रोफेशनलिज्म' के साथ-साथ 'एथिक्स' की कितनी सख्त जरूरत है।