झारखंड में खत्म हुआ राजभवन और सरकार का टकराव अब राज्यपाल-CM मिलकर चुनेंगे यूनिवर्सिटी के VC
Newsindialive Hindi April 18, 2026 06:43 PM

News India Live, Digital Desk: झारखंड के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों (VC) की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने बहुप्रतीक्षित ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026’ को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के तहत अब राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति (वीसी) और प्रति कुलपति (प्रो-वीसी) की नियुक्ति का अधिकार किसी एक के पास नहीं, बल्कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के पास संयुक्त रूप से होगा। इसी साल 17 मार्च को विधानसभा से दोबारा पारित होने के बाद अब यह विधेयक कानून की शक्ल ले चुका है।टकराव के बाद निकला बीच का रास्ताविदित हो कि इसी साल मानसून सत्र के दौरान हेमंत सरकार ने एक विधेयक पारित किया था, जिसमें नियुक्ति का पूरा अधिकार राज्यपाल से लेकर राज्य सरकार को देने का प्रावधान था। इस पर राजभवन और सरकार के बीच तीखा टकराव देखने को मिला था। तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए राज्यपाल ने विधेयक को विधिक राय के लिए वापस कर दिया था। इसके बाद मार्च के बजट सत्र में संशोधित विधेयक लाया गया, जिसमें राज्यपाल और सरकार की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की गई है।सर्च कमेटी करेगी नामों का चयन, राज्यपाल करेंगे औपचारिक नियुक्तिनए कानून के मुताबिक, कुलपतियों के चयन के लिए एक उच्चस्तरीय 'खोज समिति' (Search Committee) का गठन किया जाएगा।पैनल तैयार करना: यह समिति 3 से 5 योग्य उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार करेगी।अंतिम चयन: इस पैनल को राज्यपाल (कुलाधिपति) और मुख्यमंत्री के पास भेजा जाएगा, जहाँ आपसी सहमति से एक नाम पर मुहर लगेगी।औपचारिक आदेश: चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुलाधिपति (राज्यपाल) औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र जारी करेंगे। यदि भेजे गए नामों पर सहमति नहीं बनती, तो समिति से नई सूची मांगी जा सकती है।ऐसी होगी 'सर्च कमेटी' की संरचनाविधेयक में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सर्च कमेटी के गठन के स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। समिति के अध्यक्ष एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद होंगे, जिन्हें कुलाधिपति नामित करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में:राज्य सरकार द्वारा नामित केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक शिक्षाविद।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का एक प्रतिनिधि।उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव।संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार), जो सचिव की भूमिका में होंगे (इन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा)।छात्रों को क्या होगा फायदा? एक जैसा होगा सिलेबस और मानकइस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक मानकों में एकरूपता लाना है। अब पूरे झारखंड की यूनिवर्सिटीज में शिक्षा का पाठ्यक्रम (Curriculum) एकीकृत होगा और शिक्षण पद्धतियां मानकीकृत होंगी। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों द्वारा दी जाने वाली डिग्रियों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही, छात्रों को आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और विशेषज्ञ फैकल्टी तक समान रूप से पहुंच प्राप्त होगी, जिससे शोध और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

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