तेल की जंग में तेहरान की ललकार! प्रतिबंधों पर दी बड़ी धमकी; 'ईरानी तेल रुका तो दुनिया को भुगतने होंगे नतीजे'
TV9 Bharatvarsh April 20, 2026 02:43 PM

ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि दुनिया भर में फ्यूल की कीमतें तभी स्टेबल हो सकती हैं, जब ईरान के ऑयल एक्सपोर्ट पर से इकोनॉमिक और मिलिट्री प्रेशर खत्म हो जाए. आरिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर धमकी भरे अंदाज में लिखा कि कोई भी ईरान के ऑयल एक्सपोर्ट को रोककर दूसरों के लिए फ्री सिक्योरिटी की उम्मीद नहीं कर सकता. ऑप्शन साफ है या तो सभी के लिए फ्री ऑयल मार्केट हो, या फिर सभी को भारी कीमत चुकाने का रिस्क उठाना पड़े.

रविवार को शुरुआती कारोबार में ऑयल की कीमतें बढ़ गईं, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे टेंशन के कारण ऑयल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे. यह फारसी खाड़ी का एक ऐसा वॉटर रूट है जो दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई के लिए बहुत जरूरी है. शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में ट्रेडिंग फिर से शुरू होने के बाद, अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत 6.4% बढ़कर 87.88 डॉलर प्रति बैरल हो गई. ब्रेंट क्रूड, जिसे इंटरनेशनल बेंचमार्क माना जाता है, की कीमत 6.5% बढ़कर 96.25 डॉलर प्रति बैरल हो गई.

ईरान का बयान

ईरान ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपनी कोस्टलाइन के पास से गुजरने वाले इस रूट को कमर्शियल ट्रैफिक के लिए पूरी तरह से फिर से खोल देगा. इस खबर के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में 9% से ज्यादा की गिरावट आ गई. शनिवार को तेहरान ने अपना यह फैसला वापस ले लिया, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के पोर्ट्स पर अमेरिकी नेवी की ब्लॉकेड जारी रहेगी.

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल ने पिछले कई दशकों में दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी क्राइसिस में से एक को जन्म दिया है. एशिया और यूरोप के वे देश, जो अपना ज्यादातर ऑयल मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट करते हैं, उन्हें सप्लाई रुकने और प्रोडक्शन कटौती का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा है. हालांकि, पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की तेजी से बढ़ती कीमतें दुनिया भर के बिजनेस और आम कंज्यूमर्स को भी प्रभावित कर रही हैं.

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