Jyotirlinga History: भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम, सोमनाथ मंदिर का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही रहस्यों से भरा भी. हाल ही में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कुछ ऐसे प्राचीन अवशेष लाए गए हैं, जिन्हें लेकर दावा किया जा रहा है कि ये उसी मूल सोमनाथ शिवलिंग के अंश हैं जिसे 1000 साल पहले विदेशी आक्रमणकारियों से बचाने के लिए छिपा दिया गया था. आइए जानते हैं क्या है इन चमत्कारी अवशेषों का पूरा सच.
रायपुर में दर्शन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़शिवलिंग के इन प्राचीन अवशेषों को राजधानी रायपुर लाया गया, जहां एक विशाल हॉल में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया. बेंगलुरु से पहुंचे स्वामी प्रज्ञानंद ने विधिवत अभिषेक और पूजन कर इनका महत्व बताया और भक्तों को दर्शन कराए. यह पूरा आयोजन आर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना है. इन अवशेषों का दर्शन 30 अप्रैल तक प्रदेश के कई शहरों में कराया जाएगा और फिर इन्हें वापस सोमनाथ मंदिर में स्थापित करने की योजना है.
इन शहरों में भी होंगे दर्शनइस आध्यात्मिक यात्रा के तहत अलग-अलग शहरों में दर्शन कार्यक्रम तय किए गए हैं.
अंबिकापुर (22 अप्रैल)
रिसर्च के अनुसार, इन अवशेषों में केवल 2% लोहा होने के बावजूद इनमें असाधारण चुंबकीय गुण पाए गए हैं. इसकी संरचना में लगभग 80% बेरियम होने की बात कही गई है, जो इसे सामान्य पत्थरों से अलग बनाती है.
हवा में तैरने की मान्यतासोमनाथ शिवलिंग के हवा में तैरने की बात लोककथाओं और मान्यताओं का हिस्सा रही है. हालांकि, किसी भी रिसर्च में इसको लेकर वैज्ञानिक स्तर पर कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है.
इतिहास क्या कहता है?इतिहास के अनुसार, 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला कर ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंचाया था. उस समय दक्षिण भारत के साधुओं ने इसके टुकड़ों को सुरक्षित कर लिया. इन टुकड़ों को 11 छोटे शिवलिंगों में परिवर्तित किया गया.करीब 1000 वर्षों तक इन्हें गुप्त रूप से पूजित किया जाता रहा. 1924 में कांची के शंकराचार्य ने भविष्यवाणी की थी कि नए मंदिर निर्माण के बाद इन्हें शंकर नाम वाले संत को सौंपा जाएगा. बताया जाता है कि इसी परंपरा के तहत जनवरी 2024 में ये अवशेष श्री श्री रविशंकर को सौंपे गए.
सोमनाथ शिवलिंग की मान्यतासोमनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है. मान्यता है कि चंद्रदेव (सोम) को जब श्राप मिला और उनका तेज खत्म होने लगा, तब उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें श्राप से मुक्ति दी. इसी कारण इस स्थान का नाम सोमनाथ पड़ा. सोमनाथ को सभी ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे प्राचीन माना जाता है. कहा जाता है कि यहां स्वयं भगवान शिव ज्योति के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा बहुत ही प्रबल मानी जाती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.