बवासीर के इलाज में कचनार की जड़ प्रभावी मानी जाती है और इसे सही तरीके से इस्तेमाल करने पर राहत मिलती है। आज की आधुनिक जीवनशैली में लोग लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठकर काम करते हैं, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो गई है। कम गतिविधि के कारण युवाओं और बुजुर्गों दोनों में बवासीर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं, लेकिन कई बार ऑपरेशन के बाद समस्या दोबारा उभर सकती है।
ऑपरेशन के बाद समस्या क्यों लौटती है?
लोग मानते हैं कि ऑपरेशन के बाद बवासीर के मस्से फिर नहीं आते, लेकिन यह सही नहीं है। ऑपरेशन के दौरान सिर्फ मस्सों की ऊपरी सतह हटाई जाती है, जड़ तक नहीं। इसलिए समस्या की जड़ पर काम करना जरूरी है।
आयुर्वेद में कचनार का महत्व
आयुर्वेद में कचनार (Bauhinia variegata) की जड़ को बवासीर के इलाज में अत्यंत प्रभावी माना गया है। कचनार की जड़ पुराने मस्सों को भी ठीक करने की क्षमता रखती है और दोबारा होने की संभावना कम करती है।
कचनार की जड़ का प्रयोग
कचनार के अन्य औषधीय उपयोग