Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी के दिन पढ़ें ये कथा और आरती, जीवन में आएगी खुशहाली!
TV9 Bharatvarsh April 23, 2026 11:42 AM

Ganga Saptami Ki Katha Aur Aarti: आज वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है. ऐसे में आज गंगा सप्तमी मनाई जा रही है. मान्यता है कि वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन ही मां गंगा का प्राकट्य हुआ था. गंगा सप्तमी के दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान-ध्यान किया जाता है. इसके बाद मां गंगा की पूजा और जप-तप किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में हुए सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है.

इस दिन पूजा के समय गंगा सप्तमी की कथा और आरती अवश्य पढ़ी जाती है. ऐसा करने से जीवन में खुशहाली आती है, तो आइए पढ़ते हैं गंगा सप्तमी की व्रत कथा और आरती.

गंगा सप्तमी की कथा ( Ganga Saptami Ki Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, भगीरथ नाम के एक बेहद प्रतापी राजा ने अपने पूर्वजों को जीने-मरने के दोष से मुक्त करने के लिए मां गंगा को पृथ्वी पर लाने का निश्चय किया. फिर इसके लिए उन्होंने कठोर तप करना शुरू कर दिया. भगीरथ की भक्ति और कठोर तपस्या से मां गंगा प्रसन्न हुईं और फल स्वरूप भगीरथ की बात मान ली, लेकिन उन्होंने राजा भगीरथ को बताया कि उनके सीधा स्वर्ग से धरती पर आने से पृथ्वी असहनशील हो जाएगी.

मां गंगा की यह बात सुनकर भगीरथ अचरज में पड़ गए और इस समस्या का समाधान तलाशने लगे. फिर वो शिवजी की आराधना में लीन हो गए. भगीरथ की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे कहा कि वो वरदान मांग लें. भगीरथ ने उन्हें अपनी समस्या बताई और इसका समाधान शिव जी ने दिया. शिवजी ने गंग को अपनी जटाओं में बांध लिया, जिसके बाद मां गंगा सात धाराओं में धरती पर प्रवाहित हुईं और ऐसे भगीरथ मां गंगा को पृथ्वी पर लाने में सफल हुए.

मां गंगा आरती (Maa Ganga Aarti)

हर हर गंगे, जय मां गंगे,

हर हर गंगे, जय मां गंगे ॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता ।

जो नर तुमको ध्याता,

मनवांछित फल पाता ॥

चंद्र सी जोत तुम्हारी,

जल निर्मल आता ।

शरण पडें जो तेरी,

सो नर तर जाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

पुत्र सगर के तारे,

सब जग को ज्ञाता ।

कृपा दृष्टि तुम्हारी,

त्रिभुवन सुख दाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

एक ही बार जो तेरी,

शारणागति आता ।

यम की त्रास मिटा कर,

परमगति पाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

आरती मात तुम्हारी,

जो जन नित्य गाता ।

दास वही सहज में,

मुक्त्ति को पाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता ।

जो नर तुमको ध्याता,

मनवांछित फल पाता ॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता॥

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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