Sita Navami Puja Vidhi: आज सीता नवमी पर घर के मंदिर में जगाएं भक्ति का दीप, जानें पूजा विधि और पूजन सामग्री
TV9 Bharatvarsh April 25, 2026 10:42 AM

Janaki Jayanti Pujan Samagri: सीता नवमी का पावन पर्व आज यानी शनिवार को पूरे भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मां सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में याद किया जाता है, जिसे जानकी जयंती भी कहते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के शुभ संयोग में जब राजा जनक यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल चला रहे थे, तब उन्हें कलश में देवी सीता प्राप्त हुई थीं. यह दिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है. इस पावन तिथि पर मां सीता और भगवान राम का विधि-विधान से पूजन करने से जीवन में सकारात्मकता आती है.

मां सीता की पूजा के लिए जरूरी पूजन सामग्री

सीता नवमी की पूजा को सफल बनाने के लिए कुछ विशेष सामग्री की जरूरत होती है, जिन्हें पहले ही एकत्रित कर लेना चाहिए. पूजन के लिए मां सीता और प्रभु राम की सुंदर प्रतिमा या चित्र, एक साफ चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा जरूरी है. इसके साथ ही तांबे का कलश, नारियल, आम के पत्ते, गंगाजल, अक्षत (बिना टूटे चावल), रोली, चंदन और धूप-दीप की व्यवस्था करें. मां सीता के शृंगार के लिए लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां और अन्य सुहाग की सामग्री अवश्य रखें. भोग के लिए पीले फल, केसरिया मिठाई या घर में बना शुद्ध हलवा उत्तम रहता है. ताजे फूलों की माला और पंचामृत का मिश्रण पूजा में श्रद्धा का संचार करता है. यह सामग्री हमारे समर्पण और अटूट विश्वास को दर्शाती है.

मां सीता की पूजन की सरल और प्रभावी विधि

शुद्धि और तैयारी: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें.

स्थापना: एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर कलश स्थापित करें और मां सीता व भगवान राम की प्रतिमा या चित्र को सम्मानपूर्वक विराजित करें.

पवित्र स्नान: प्रतिमा को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें साफ कपड़े से पोंछकर सुंदर वस्त्र और फूलों की माला पहनाएं.

श्रृंगार और अर्पण: दीपक जलाएं. मां सीता को सिंदूर लगाएं और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. भगवान राम को तिलक के रूप में चंदन लगाएं और दोनों को ताजे फल व फूल चढ़ाएं.

मंत्र और आरती: पूरी श्रद्धा के साथ ‘सिया-राम’ के मंत्रों का जाप करें. अंत में धूप-दीप से मां सीता और प्रभु राम की आरती उतारें.

मां सीता के व्रत का फल और आध्यात्मिक महत्व

सीता नवमी पर किया गया व्रत और पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक बल भी प्रदान करता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजन करने वाली महिलाओं को मां सीता जैसा धैर्य और अपने जीवनसाथी का लंबा साथ प्राप्त होता है. यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि कठिन समय में भी मर्यादा और सच्चाई का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. जब हम पुरानी नकारात्मक बातों को पीछे छोड़कर भक्ति में लीन होते हैं, तो हमारे भीतर एक नई ऊर्जा का जन्म होता है. मां सीता का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की प्रेरणा देता है. यही आध्यात्मिक शुद्धि हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती है और हमारे जीवन को सही ढंग से आगे बढ़ाती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. TV9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.comपर संपर्क करें.

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