Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा 2026 की तिथि हर वर्ष वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि (चंद्रमा के दिन) को मनाया जाता है. इस दिन स्नान और दान करने का विशेष महत्व है.
ऐसा करने से पाप नष्ट होने के साथ आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है. भक्त इस शुभ अवसर पर उपवास रखने के साथ भगवान सत्यनारायण, देवी लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा की जाती है.
मान्यताओं के मुताबिक यह परंपरा घर में सुख, समृद्धि और शांति को आकर्षित करती है. इसके अलावा वैशाख पूर्णिमा पर अपनी राशि के अनुसार दान-पुण्य करने से चंद्र दोष का प्रभाव शांत होता है. वैशाख पूर्णिमा की सही तिथि, व्रत रखने का समय, स्नान करने का समय और दान-पुण्य करने का समय क्या रहने वाला है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा की तिथि गुरुवार 30 अप्रैल को रात 9.12 बजे से शुरू होकर अगले दिन शुक्रवार 1 मई को रात 10.52 बजे तक रहेगी. उदयतिथि और चंद्रोदय के समय के आधार पर वैशाख पूर्णिमा शुक्रवार 1 मई को मनाई जाएगी.
वैशाख पूर्णिमा का व्रत 1 मई को रखा जाएगा, इसके साथ ही इस दिन से जुड़े अनुष्ठानिक स्नान और दान-पुण्य के कार्य भी संपन्न किए जाएंगे. गौरतलब है कि, पूरे साल पूर्णिमा का व्रत और अनुष्ठानिक स्नान की तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं.
1 मई को स्नान करने के लिए सबसे शुभ मुहूर्त 4.15 से 4.58 बजे तक रहेगा. वैशाख पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त खास तौर से अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.52 से दोपहर 12.45 बजे तक रहने वाला है. निशिता मुहूर्त रात 11.57 से अगले दिन 12.39 तक रहने वाला है.
वैशाख पूर्णिमा के मौके पर लक्ष्मी जी की पूजा करने के लिए सबसे सही समय प्रदोष काल का रहने वाला है, जो शाम6.56 बजे सूर्यास्त के बाद शुरू होता है. इस दिन सूर्योदय सुबह 5.41 मिनट तक रहेगा. इस साल वैशाख पूर्णिमा इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह सिद्धि योग और स्वाति नक्षत्र के साथ पड़ रही है.
सिद्धि योग सुबह से रात 9.13 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद व्यतिपात योग का प्रभाव शुरू हो जाएगा. सिद्धि योग को जप, तप और ध्यान जैसी आध्यात्मिक साधानाओं के लिए शुभ माना जाता है. स्वाती नक्षत्र 2 मई को सुबह से 4.35 बजे तक प्रभावी रहेगा.
इस साल वैशाख पूर्णिमा पर चंद्रमा शाम 6.52 बजे उदय होने की संभावना है. व्रत रखने वालों को चंद्रमा के पूर्ण रूप से उदय होने और तेज प्रकाश देने के बाद ही अर्घ्य करना चाहिए. अर्घ्य में कच्चे दूध और अक्षत का मिश्रण होना जरूरी है. इस खास तिथि पर दान का भी विशेष महत्व होता है.
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