28 अप्रैल 2026 को घोषित गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त कर राज्य में अपनी सर्वोच्चता सिद्ध कर दी है। 15 नगर निगम, 84 नगरपालिका, 34 जिला पंचायत और 260 तालुका पंचायतों की कुल 10,005 सीटों के लिए हुए इस चुनावी महासंग्राम में मतदाताओं ने विकास के मुद्दे पर भाजपा पर अटूट विश्वास जताया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, विपक्षी दल भाजपा के विजय रथ को रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। नगरपालिकाओं में भाजपा का 'केसरिया' परचम
राज्य की 84 नगरपालिकाओं के परिणामों में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है। भाजपा ने कुल 1676 सीटों पर भव्य जीत दर्ज की है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस मात्र 367 सीटों पर सिमट कर रह गई। गिर सोमनाथ की उना नगरपालिका में तो भाजपा ने सभी 36 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ इन परिणामों से और भी मजबूत होती दिख रही है।
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जिला पंचायतों में विपक्ष का पूर्ण सफायाजिला स्तर की राजनीति में भी भाजपा का दबदबा बरकरार रहा। 34 जिला पंचायतों के चुनावों में भाजपा ने कुल 701 सीटें जीतकर एकछत्र शासन स्थापित किया है। कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि उसे पूरे राज्य में केवल 103 सीटों से संतोष करना पड़ा। सूरत सहित सभी महत्वपूर्ण जिला पंचायतों पर भाजपा ने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा है।
तालुका पंचायतों में ग्रामीण मतदाताओं का मिजाज260 तालुका पंचायतों के परिणामों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी भाजपा की ही लहर देखी गई। भाजपा ने 2943 सीटों पर जीत हासिल कर ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ बनाई, जबकि कांग्रेस को 769 सीटें मिलीं। राजकोट, जसदन और टंकारा जैसी महत्वपूर्ण तालुका पंचायतों में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है। हालांकि, कुछ गिने-चुने तालुकों में कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने में सफल रही है।
गोधरा और भावनगर में भाजपा का नया शासनपंचमहल के गोधरा में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। पहली बार 44 में से 27 सीटें जीतकर भाजपा ने यहां पूर्ण सत्ता प्राप्त की है, जबकि कांग्रेस यहां अपना खाता भी नहीं खोल सकी। इसी तरह भावनगर नगर निगम में 52 में से 44 सीटें और आणंद नगर निगम में 52 में से 43 सीटों के साथ भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। ऊंझा, व्यारा और राजपीपला जैसी पालिकाओं में भी भाजपा ने स्पष्ट शासन स्थापित किया।
कांग्रेस की सीमित जीत और कहां मिली राहत?भाजपा की इस सुनामी के बीच कांग्रेस केवल कुछ ही स्थानों पर अपनी सत्ता बचाने में सफल रही। साबरकांठा की वडाली नगरपालिका में कांग्रेस सत्ता हासिल करने में कामयाब रही। इसके अलावा मोरबी की वांकानेर तालुका पंचायत और तापी की व्यारा तालुका पंचायत में भी कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर अपनी साख बचाई। हालांकि, राज्य स्तर पर कांग्रेस की यह जीत बेहद सीमित मानी जा रही है।
आदिवासी बेल्ट में 'आप' (AAP) का दमइस चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर आम आदमी पार्टी (AAP) ने किया है। आदिवासी बहुल क्षेत्र छोटाउदयपुर में 26 में से 15 सीटें और नेत्रंग में 16 में से 9 सीटें जीतकर 'आप' ने अपनी सत्ता स्थापित की है। सौराष्ट्र के विसावदर में भी 18 में से 11 सीटें जीतकर पार्टी ने सीधा शासन प्राप्त किया। ये परिणाम दर्शाते हैं कि अब गुजरात में तीसरे विकल्प के रूप में AAP मजबूती से उभर रही है।
कैबिनेट मंत्री के गढ़ में बड़ा उलटफेरपरिणामों में कुछ स्थानों पर भाजपा के लिए चिंताजनक स्थिति भी बनी है। आणंद के बोरसद में कैबिनेट मंत्री रमण सोलंकी के क्षेत्र में ही भाजपा बहुमत से दूर रह गई। यहां निर्दलीयों ने 18 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया, जबकि भाजपा को 17 सीटें मिलीं। यह परिणाम भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
बहुचराजी में अजीब स्थिति: जीत भाजपा की, अध्यक्ष कांग्रेस कामेहसाणा की बहुचराजी तालुका पंचायत में एक बहुत ही दिलचस्प मामला सामने आया है। यहां भाजपा ने 16 में से 13 सीटें जीतकर भारी बहुमत तो हासिल किया, लेकिन आरक्षित सीट (SC) के लिए भाजपा के पास कोई विजयी उम्मीदवार नहीं होने के कारण, वहां 3 सीटें जीतने वाली कांग्रेस का उम्मीदवार अध्यक्ष बन सकता है। यह मामला राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
कड़ा मुकाबला, 'टाई' और दिग्गजों की हारचुनावों में 3 तालुका पंचायतों में 'टाई' (बराबरी) की स्थिति बनी है। जूनागढ़, दांता और सोनगढ़ तालुका पंचायत में भाजपा और विपक्षी दलों के बीच बराबर सीटें बंटी हैं। अहमदाबाद के सरसपुर वार्ड में भाजपा का पैनल टूटा है, जहां कांग्रेस की अर्चना चौहान विजेता बनीं। दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक गुलाबसिंह चौहान के भाई भरतसिंह की हार कांग्रेस के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत झटका है। Edited by : Sudhir Sharma