Kurma Jayanti: कूर्म जयंती इस वर्ष 1 मई 2026 को मनाई जाएगी. यह जयंती वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है. इस दिन हम भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक कूर्म भगवान की पूजा करते है. भगवान विष्णु ने ब्रह्मांड की रक्षा और धर्म की स्थापना हेतु अपना दूसरा अवतार कूर्म (कछुआ) अवतार लिया था. इस विशेष अवसर पर, आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में स्थित श्री कूर्मनाथस्वामी मंदिर की महिमा और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यह पूरे विश्व में भगवान कूर्म को समर्पित एकमात्र प्रमुख प्राचीन मंदिर है. इस दिन मंदिर में प्रमुख रूप से डोल उत्सव मनाया जाता है.
कूर्म भगवान की देव गाथा
जब देवों और असुरों के बीच अमृत के लिए मंथन शुरू हुआ, तो मंदराचल पर्वत को मथानी बनाया गया. लेकिन आधार न होने के कारण पर्वत समुद्र में डूबने लगा, तब भगवान विष्णु ने विशाल कछुए (कूर्म) का रूप धारण किया और पर्वत को अपनी पीठ पर सहारा दिया था. माना जाता है कि श्री कूर्माम आंध्रप्रदेश में वही पवित्र स्थान है जहां पर भगवान विष्णु ने अवतार लिया था.
भगवान के इसी धैर्य और स्थिरता के प्रतीक स्वरूप में कूर्म जयंती मनाई जाती है. श्री कूर्माम मंदिर वह स्थान माना जाता है जहाँ उस महान अवतार की ऊर्जाशक्ति आज भी विराजमान है.
मंदिर की अनोखी विशेषताएं
श्री कूर्माम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान की मूर्ति प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा श्वेत ने भगवान विष्णु के कूर्म अवतार के दर्शन के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने मंदिर के पास स्थित 'श्वेत पुष्करणी' (मंदिर का पवित्र तालाब) में स्वयं को प्रकट किया. यही कारण है कि इस मंदिर को अत्यंत जागृत माना जाता है, क्योंकि यहाँ मूर्ति की स्थापना नहीं की गई थी, बल्कि भगवान ने स्वयं प्रकट होना स्वीकार किया था.
अधिकतर मंदिरों में एक ध्वजस्तंभ होता है, लेकिन यहां दो ध्वजस्तंभ हैं. यह मंदिर की विशिष्टता को दर्शाता है. जयंती के दिन मंदिर के दोनों ध्वजस्तंभों को विशेष रूप से सजाया जाता है, जो श्री और भू शक्ति के मिलन का प्रतीक हैं.
यहां भगवान की मूर्ति पश्चिम की ओर मुख किए हुए है, जबकि मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व में है. इसके पीछे भी एक अलौकिक भक्त की कहानी है,मान्यता है कि मूल रूप से भगवान का मुख पूर्व की ओर था, लेकिन महान संत श्री रामानुजाचार्य की भक्ति और प्रार्थना के कारण भगवान ने अपना मुख पश्चिम की ओर घुमा लिया था, ताकि वे अपने भक्त को दर्शन दे सकें.
मंदिर में कछुआ संरक्षण केंद्र
मंदिर परिसर में एक विशेष कूर्म पार्क बनाया गया है। यहां दुर्लभ प्रजाति के स्टार कछुओं (Star Tortoises) का संरक्षण किया जाता है. मंदिर परिसर में बने कछुआ संरक्षण केंद्र में इस दिन विशेष रौनक रहती है. श्रद्धालु यहां मौजूद दुर्लभ कछुओं को भोजन कराते हैं, जिसे साक्षात भगवान कूर्म की सेवा के समान माना जाता है.
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