भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में सकारात्मक रुझान जारी है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट JLL इंडिया के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 के बीच देश के सात प्रमुख शहरों में अपार्टमेंट की कीमतों में सालाना आधार पर 8 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि बढ़ती इनपुट लागत, भूमि और निर्माण खर्च में इजाफा, और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की बढ़ती मांग के कारण हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन शहरों में दिल्ली एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता शामिल हैं। मुंबई क्षेत्र में मुंबई सिटी, उपनगर, ठाणे और नवी मुंबई शामिल हैं, जबकि दिल्ली एनसीआर में दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और सोहना शामिल हैं। इस रिपोर्ट में केवल अपार्टमेंट्स को ध्यान में रखा गया है, जबकि रोहाउस, विला और प्लॉटेड डेवलपमेंट्स को बाहर रखा गया है।
JLL का कहना है कि 2026 की पहली तिमाही में रिहायशी प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार वृद्धि बनी रही, जो मजबूत मांग, बढ़ती लागत और प्रीमियम उत्पादों की ओर झुकाव को दर्शाती है। हालांकि, निर्माण और ऑपरेशनल लागत के दबाव के चलते कीमतों में आगे भी बढ़ोतरी जारी रह सकती है, लेकिन इसकी गति कुछ धीमी रह सकती है।
सेगमेंट के अनुसार, 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले फ्लैट्स की बिक्री में 24 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 20,269 यूनिट रह गई। वहीं, 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले अपार्टमेंट्स की मांग मजबूत बनी रही, जहां बिक्री 30 प्रतिशत बढ़कर 50,362 यूनिट तक पहुंच गई।
शिवा कृष्णन के अनुसार, हाउसिंग मार्केट वर्तमान में एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है, जहां सप्लाई मजबूत है लेकिन खरीदार आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण सोच-समझकर निर्णय ले रहे हैं। करिश्मा सिंह ने बताया कि होमबायर्स अब उन डेवलपर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनका ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है। इसके परिणामस्वरूप, बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स की बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि हो रही है और वे विभिन्न प्राइस रेंज में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।