विजय का 'विजय' भव: क्या 52 साल बाद दोहराया जा रहा है इतिहास? जानें थलापति की कुंडली के वो 3 राज जिसने हिला दी तमिलनाडु की सत्ता!
Hirdesh Kumar Singh May 05, 2026 01:12 AM

Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु की राजनीति के लिए आज की सुबह केवल एक सामान्य मतगणना की सुबह नहीं है, बल्कि यह एक नए युग की आहट जैसी महसूस हो रही है. जैसे-जैसे ईवीएम (EVM) के आंकड़े सामने आ रहे हैं, चेन्नई से लेकर कन्याकुमारी तक की गलियों में बस एक ही चर्चा है, क्या 'थलापति' विजय ने वाकई करिश्मा कर दिया है? अभिनेता विजय की पार्टी तमिझागा वेत्री कड़गम (TVK) ने शुरुआती रुझानों में जिस तरह की बढ़त बनाई है, उसने पिछले दो दशकों के स्थापित राजनीतिक समीकरणों को हाशिए पर धकेल दिया है.

राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) कह सकते हैं, लेकिन ज्योतिष के नजरिए से देखें तो यह सितारों की एक ऐसी बिसात है जो दशकों में एक बार बिछती है. क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है? क्या 1972-77 का वह दौर वापस आ गया है जब एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने द्रविड़ राजनीति की दिशा बदल दी थी? आइए, आज के पंचांग, विजय की कुंडली और उन तीन बड़े ज्योतिषीय राजों का विश्लेषण करते हैं जो इस समय को ऐतिहासिक बना रहे हैं.

रुझान या हकीकत? क्या थलापति विजय ने हिला दिया द्रविड़ राजनीति का 50 साल पुराना किला?

आज सुबह 8 बजे जब डाक मतपत्रों की गिनती शुरू हुई, तभी से हवा का रुख साफ होने लगा था. शुरुआती रुझानों में विजय की पार्टी TVK 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और AIADMK के कई दिग्गज अपने ही गढ़ में पीछे चल रहे हैं. खुद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की कोलाथुर सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा बना हुआ है. हालांकि, यह शुरुआती रुझान हैं और अंतिम नतीजों तक आंकड़ों में बड़ा फेरबदल संभव है, लेकिन एक बात तय है, विजय ने तमिलनाडु के द्विपक्षीय राजनीतिक ढांचे (Bipolar Politics) को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है.

मूल नक्षत्र और सिद्धि योग का वो 'खतरनाक' मेल, जिसने पलटी सत्ता की बाजी

ज्योतिष में किसी भी घटना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन आकाश में ग्रह क्या कहनी लिख रहे थे. आज 4 मई, 2026 का पंचांग बेहद दिलचस्प संकेत दे रहा है. आज वैशाख मास की तृतीया और चतुर्थी तिथि का मेल है. ज्योतिष शास्त्र में चतुर्थी को 'खल' तिथि भी कहा जाता है, जो पुरानी व्यवस्था को तोड़कर नई व्यवस्था बनाने के लिए जानी जाती है.

आज चंद्रमा का गोचर मूल और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रभाव में है. 'मूल' नक्षत्र का स्वभाव ही जड़ों को हिलाना है. जब भी सत्ता परिवर्तन की बड़ी घटनाएं होती हैं, तो अक्सर मूल नक्षत्र की भूमिका देखी गई है. यह नक्षत्र केतु द्वारा शासित है, जो अचानक और क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है. इसके साथ ही, आज 'सिद्धि योग' बन रहा है, जो किसी भी नए प्रयास को स्थायित्व देने का संकेत देता है. पंचांग के ये संकेत बताते हैं कि आज जो भी परिणाम आएंगे, वे केवल पांच साल के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के लिए तमिलनाडु की राजनीति की नई नींव रखेंगे.

पहला राज: बृहस्पति की महादशा और 'राजयोग', क्या सितारों ने पहले ही लिख दी थी विजय की जीत?

किसी भी बड़े राजनेता के उदय के पीछे ग्रहों की महादशा का सबसे बड़ा हाथ होता है. विजय का जन्म 22 जून 1974 को हुआ था. उनकी कुंडली के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि वे इस समय बृहस्पति (Jupiter) की एक अत्यंत प्रभावशाली अंतर्दशा से गुजर रहे हैं. उनकी कुंडली में बृहस्पति कुंभ राशि में विराजमान हैं. कुंभ एक स्थिर राशि है जो 'जनता' और 'समाज' का प्रतिनिधित्व करती है.

जब बृहस्पति जैसा शुभ ग्रह जनता के भाव को प्रभावित करता है, तो व्यक्ति की बातों को लोग 'आदेश' की तरह मानने लगते हैं. उनकी कुंडली का अष्टकवर्ग स्कोर (Ashtakavarga Strength) दशम भाव यानी सत्ता के घर में 30 से ऊपर है. ज्योतिषीय सिद्धांत के अनुसार, जब दशम भाव इतना बलवान हो और उस पर बृहस्पति की कृपा हो, तो व्यक्ति को सत्ता के शिखर तक पहुंचने से रोकना मुश्किल होता है. यह राजयोग उन्हें एक 'मसीहा' की छवि प्रदान कर रहा है, जो द्रविड़ राजनीति के स्थापित नायकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

52 साल बाद दोहराया गया इतिहास: क्या विजय की कुंडली में भी है MGR वाला 'शुक्र-चंद्र' योग?

तमिलनाडु में फिल्म और राजनीति का रिश्ता बहुत पुराना है, लेकिन हर अभिनेता सफल नहीं होता. विजय की सफलता के पीछे जो दूसरा सबसे बड़ा राज है, वह है उनकी कुंडली में शुक्र और चंद्रमा का वह दुर्लभ मेल, जो कभी एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की कुंडली में देखा गया था.

1972 में जब MGR ने अपनी नई पार्टी बनाई थी और 1977 में सत्ता संभाली थी, तब उनकी कुंडली में शुक्र (कला) और चंद्रमा (जनता का मन) का एक ऐसा त्रिकोण बना था जिसने उन्हें 'अजेय' बना दिया था. विजय की कुंडली में भी शुक्र बेहद मजबूत स्थिति में है, जो उन्हें अपार जन-आकर्षण (Mass Appeal) देता है. ज्योतिषीय भाषा में इसे 'सम्मोहन योग' भी कहा जा सकता है. आज के रुझानों में जिस तरह से महिला वोटर्स और युवाओं ने TVK की ओर रुख किया है, वह इसी शुक्र के प्रभाव का नतीजा है. यह 52 साल पुराना चक्र अब पूरा होता दिख रहा है.

अंकशास्त्र का 'जादुई 4': मूलांक 22 और 4 मई की तारीख के बीच का वो रहस्यमय कनेक्शन

अंकशास्त्र (Numerology) के दृष्टिकोण से देखें तो विजय का पूरा व्यक्तित्व और उनकी सफलता अंक '4' के इर्द-गिर्द घूमती है. उनका जन्म 22 तारीख को हुआ (2+2 = 4). अंकशास्त्र में 4 का स्वामी राहु है. राजनीति में राहु को 'शतरंज का खिलाड़ी' माना जाता है. यह वह ग्रह है जो परंपराओं को तोड़ता है और अनपेक्षित परिणाम देता है.

आज की तारीख 4 मई है. जब किसी व्यक्ति का जन्म अंक और वर्तमान समय का अंक एक हो जाता है, तो उसकी ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है. यह संयोग विजय को एक ऐसी 'रणनीतिक बढ़त' (Strategic Advantage) दे रहा है जिसे भांपने में उनके विरोधी नाकाम रहे. राहु के प्रभाव के कारण ही उन्होंने अपनी राजनीतिक चालें बहुत गुप्त रखीं और सही समय पर हमला किया. लोग इसे 'विजय का जादू' कह सकते हैं, लेकिन अंकशास्त्री इसे राहु का वह चक्र कहेंगे जिसने सत्ता की कुर्सी के लिए रास्ता साफ कर दिया है.

शनि का 'न्याय चक्र': क्यों भारी पड़ी ग्रहों की चाल और कहां चूके द्रविड़ राजनीति के दिग्गज?

तमिलनाडु की राजनीति में शनि (Saturn) का हमेशा से बड़ा रोल रहा है क्योंकि शनि 'आम आदमी' का ग्रह है. पिछले कुछ वर्षों से शनि का गोचर मीन राशि में चल रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सत्ताधारी दल के लिए शनि की यह स्थिति 'कठिन परीक्षा' वाली रही है. शनि जब न्याय की कुर्सी पर बैठता है, तो वह जनता के बीच दबे हुए असंतोष को बाहर लाता है.

यही वह मोड़ है जहां विजय को बढ़त मिली. शनि ने जहां सत्ता पक्ष के लिए चुनौतियां खड़ी कीं, वहीं विजय के लिए एक 'क्लीन स्लेट' तैयार कर दी. जनता का वह वर्ग जो द्रविड़ राजनीति के दोनों ध्रुवों से थक चुका था, उसे शनि ने विजय के रूप में एक तीसरा विकल्प सुझाया. रुझानों में 100 से अधिक सीटों पर TVK की बढ़त इसी 'शनि के न्याय' का भौतिक स्वरूप मानी जा रही है.

क्या नतीजे अभी भी बदल सकते हैं? ज्योतिष और राजनीति के बीच फंसा 'अंतिम घंटे' का रोमांच

हालांकि रुझान विजय की ओर झुक रहे हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अभी मतगणना के कई दौर बाकी हैं. राजनीति और ज्योतिष दोनों में एक बात समान है, अंतिम क्षण तक कुछ भी निश्चित नहीं होता. DMK और AIADMK के पास दशकों पुराना संगठनात्मक ढांचा और बूथ लेवल की मजबूती है. जैसे-जैसे ग्रामीण क्षेत्रों और इंटीरियर तमिलनाडु के राउंड्स खुलेंगे, आंकड़ों में बड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है. राजनीति में आखिरी दो घंटे अक्सर बाजी पलट देते हैं. इसलिए, जहां सितारे विजय के पक्ष में एक मजबूत आधार दिखा रहे हैं, वहीं लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अंतिम वोट की गिनती ही सर्वोपरि है. यह लेख ज्योतिषीय संभावनाओं और वर्तमान पैटर्न के आधार पर एक विश्लेषण है, अंतिम निर्णय केवल जनता का ही होगा.

यह सिर्फ चुनाव नहीं, समय का फैसला है, क्या शुरू हो गया है तमिलनाडु का 'स्वर्ण युग'?

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि तमिलनाडु आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है. यदि ये रुझान परिणामों में बदलते हैं, तो यह मान लेना चाहिए कि 2026 का यह साल एक नए 'स्वर्ण युग' की शुरुआत है. यह सिर्फ एक चुनाव नहीं है, बल्कि समय का वह चक्र है जो हर 50 साल में खुद को दोहराता है. विजय की कुंडली के ये राज और आज के पंचांग का यह दुर्लभ संयोग इशारा कर रहा है कि तमिलनाडु की जनता ने बदलाव की नई स्क्रिप्ट लिख दी है.

अब देखना यह होगा कि क्या 'थलापति' वाकई उस सिंहासन पर विराजमान होते हैं, जिसका सपना उनके लाखों प्रशंसक देख रहे हैं. यह सिर्फ चुनाव नहीं, समय का निर्णय है, और इस बार शायद जनता के साथ-साथ ग्रह भी बदलाव की भाषा बोल रहे हैं.

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