केरल में LDF को करारा झटका, 21 में से 13 मंत्री चुनाव हारे; देखें किसे कहां मिली मात?
एबीपी न्यूज़ May 06, 2026 06:12 AM

Kerala Assembly Election: केरल विधानसभा चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मंत्रिमंडल के कुल 13 मंत्रियों को करारी हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन ने भारी बहुमत हासिल किया. भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा साझा किए गए नवीनतम चुनावी आंकड़ों के मुताबिक यहां उन मंत्रियों की पूरी सूची दी गई है जिन्हें चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है:-

हारने वाले मंत्रियों की लिस्ट

  • वीना जॉर्ज (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री) अरनमुला में पराजित
  • एम.बी. राजेश (स्थानीय स्वशासन, आबकारी और संसदीय कार्य मंत्री) त्रिथाला में पराजित
  • ओ.आर. केलू (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री) मनंथावडी में पराजित
  • आर. बिंदु (उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय मंत्री) इरिनजालकुडा में पराजित
  • जे. चिंचुरानी (पशुपालन मंत्री) चदयामंगलम में पराजित
  • पी. राजीव (उद्योग, कानून और कॉयर मंत्री) कलामसेरी में पराजित
  • के.बी. गणेश कुमार (केरल के परिवहन मंत्री) पथानापुरम में पराजित
  • वी.एन. वासावन (सहकारिता, बंदरगाह और देवास्वम मंत्री) एट्टुमानूर में पराजित
  • वी. शिवनकुट्टी (सामान्य शिक्षा और श्रम मंत्री) नेमोम में पराजित
  • वी. अब्दुर्रहमान (खेल, वक्फ और हज मंत्री) तिरूर में पराजित
  • ए.के. ससींद्रन (वन और वन्यजीव मंत्री) एलाथुर में पराजित
  • रोशी ऑगस्टीन (जल संसाधन मंत्री) इडुक्की में पराजित
  • रामचंद्रन कडन्नपल्ली (पंजीकरण, संग्रहालय और पुरातत्व मंत्री) कन्नूर में पराजित.  ये सभी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में हार गए हैं.

केरल में पिछली पिनाराई विजयन सरकार के 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल में से केवल 6 मंत्री ही अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे, जिनमें खुद पिनाराई विजयन भी शामिल हैं. 

क्यों मिली इतनी बड़ी हार?

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में पिनाराई विजयन सरकार के 13 मंत्रियों की हार के पीछे कई बड़ी वजहें हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:-

सत्ता विरोधी लहर- लगातार 10 साल या दो कार्यकाल से पिनाराई विजयन की सरकार सत्ता में थी. लंबे शासनकाल में मतदाताओं में सरकार और उनके मंत्रियों के प्रति भारी असंतोष था. 

लगातार बढ़ता कर्ज- केरल पर 4.5 लाख करोड़ से अधिक का भारी सार्वजनिक कर्ज हो चुका था. सरकारी कर्मचारियों के वेतन में देरी, पेंशन को लेकर संकट और युवाओं के लिए नौकरियों की कमी जैस मुद्दों ने मंत्रियों के खिलाफ माहौल बनाने का काम किया. 

भ्रष्टाचार के भी आरोप- पिनाराई सरकार के कार्यकाल के दौरान कई घोटाले सामने आए. इनमें सबरीमाला मंदिर में सोने की हेराफेरी का विवाद और को-ऑपरेटिव बैेक घाेटाले जैसे कांड भी शामिल रहे. इन आरोपों से मंत्रियों की छवि को नुकसान पहुंचा. 

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