Kapur Aarti Bujhna Shubh Ya Ashubh: आरती के दौरान कपूर का बुझना नहीं होता है अशुभ, घबराने की बजाय पूरी करें पूजा
TV9 Bharatvarsh May 06, 2026 11:43 PM

Camphor in Puja: सनातन धर्म में पूजा-पाठ की हर परंपरा का अपना विशेष अर्थ और उद्देश्य होता है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण होती है आरती क्योंकि इसके बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है. पूजा के तमाम चरणों में जैसे धूप, दीपक और प्रसाद चढ़ाने के बाद आरती की जाती है. आरती का प्रकाश केवल एक दृश्य सौंदर्य नहीं है, बल्कि भक्तों के लिए ईश्वर की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है.

आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती का प्रकाश मनुष्य के अज्ञान के अंधकार को दूर करता है और ज्ञान का प्रकाश जगाता है. साथ ही, यह मन में निगेटिव विचारों को कम करने और पॉजिटिव दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होता है. ऐसे में कई बार आरती करते समय जलाया गया कपूर बुझ जाता है, तोक्या इसे अपशगुन मानते हैं?

आरती में कपूर का इस्तेमाल

मान्यताओं के मुताबिक, आरती में कपूर का विशेष महत्व है. कपूर जलने पर पूरी तरह पिघल जाता है और राख नहीं छोड़ता. यह मनुष्य के अहंकार और सांसारिक इच्छाओं के नाश का प्रतीक है. यानी, इसके पीछे का सिद्धांत यह है कि मनुष्य को अपना अहंकार त्यागकर ईश्वर में विलीन हो जाना चाहिए. वैज्ञानिक दृष्टि से, कपूर की सुगंध वातावरण में मौजूद कीटों को नष्ट करने और पर्यावरण को शुद्ध करने में सहायक होती है.

आरती जलाने की विधि

आरती जलाने की विधि का भी अपना विशेष शास्त्र है. आमतौर पर, कपूर को एक साफ बर्तन में जलाया जाता है और मूर्ति को चरण, नाभि और मुख के पास ले जाकर पूरी मूर्ति को प्रकाश से भर दिया जाता है. जरूरत पड़ने पर बीच में ज्वाला न बुझे इसके लिए अतिरिक्त कपूर तैयार रखने की प्रथा है. पूजा के अंत में, भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस दिव्य ज्वाला को आंखों में लगाया जाता है. परंपराओं में, आरती के दो प्रकार हैं जिन्हें एका आरती और पंच आरती कहा जाता है, जिसमें पंच आरती को पांच तत्वों का प्रतीक माना जाता है.

क्या आरती का कपूर बुझना अशुभ होता है?

कई भक्त चिंतित रहते हैं कि आरती के दौरान कपूर बुझ जाए या थाली से गिर जाए तो अशुभ होता है. हालांकि, वास्तव में यह हवा की गति, कपूर की गुणवत्ता या तकनीकी कारणों से होने वाली घटना है, न कि ईश्वरीय क्रोध. ऐसे मामलों में घबराने की बजाय श्रद्धापूर्वक कपूर को फिर से जलाकर आरती को पूरा करना चाहिए. याद रखें कि ईश्वर को भक्त की भक्ति चाहिए, न कि ऐसी आकस्मिक घटनाएं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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