बेगूसराय ब्यूरो। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की देखरेख में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। सिविल कोर्ट परिसर, गांधी स्टेडियम, तेघड़ा, मंझौल, बलिया, बखरी अनुमंडलीय न्यायालय तथा रेलवे कोर्ट बरौनी सहित अलग-अलग स्थानों पर आयोजित इस लोक अदालत में 3480 मामलों का निष्पादन आपसी समझौते के आधार पर किया गया।विभिन्न मामलों में करीब 4 करोड़ 12 लाख रुपये पर समझौता हुआ। राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष ऋषिकांत, डीएलएसए सचिव करुणा निधि प्रसाद आर्य, डीएम श्रीकांत शास्त्री, एसपी मनीष एवं परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विजेंद्र कुमार आदि दीप प्रज्ज्वलित कर किया। राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य आकर्षण ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों का निष्पादन रहा।
इसके लिए गांधी स्टेडियम में विशेष रूप से पांच बेंचों का गठन किया गया था। शाम 7 बजे तक ट्रैफिक चालान के 688 मामलों का निष्पादन कर 16 लाख रुपये की वसूली की गई। लोगों को ट्रैफिक चालान राशि में 50 प्रतिशत तक की छूट का लाभ भी दिया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौतावादी आपराधिक मामलों, में पारिवारिक विवाद, बैंक ऋण वसूली, बिजली विभाग, मोटर दुर्घटना दावा, रेलवे कोर्ट एवं अन्य मामलों का निपटारा किया गया। आंकड़ों के अनुसार 1729 आपराधिक मामलों का निष्पादन किया गया। वहीं, बैंकों ने 1759 मामलों में लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपये पर समझौता किया। बिजली विभाग के 56 मामलों में करीब 44 लाख रुपये पर समझौता हुआ।दुर्घटना दावा के एक मामले में 15 लाख 38 हजार रुपये का निष्पादन किया गया। परिवार न्यायालय के 13 मामलों का निपटारा किया गया। रेलवे कोर्ट बरौनी में 679 मामलों का निष्पादन हुआ। अनुमंडल न्यायालय मंझौल में 34, बखरी में 93, बलिया में 60 और तेघड़ा में 76 मामलों का निष्पादन किया गया। डीएलएसए के सचिव करुणा निधि प्रसाद आर्य ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लोगों को तुरंत और सस्ता न्याय उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। उद्घाटन करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋषिकांत ने कहा कि जिला प्रशासन, न्यायिक पदाधिकारियों और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समन्वय से राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया है।
लोक अदालत न्याय पाने का सरल, सुलभ और कम खर्चीला माध्यम है, जिससे साल पुराने विवादों का त्वरित समाधान संभव हो पाता है। जिले में 20 बेंचों का गठन किया गया था। संचालन की जिम्मेदारी न्यायाधीश विजेंद्र कुमार, संजय कुमार तृतीय, रविशंकर कुमार, अरुण कुमार, श्रीराम झा, मनोज कुमार पंचम, नवीन कुमार श्रीवास्तव, कविता कुमारी, विवेक चंद्र वर्मा, रंजन कुमार, सुशांत कुमार, पप्पू कुमार पंडित, राकेश कुमार, आशुतोष कुमार, सत्य प्रकाश, रणधीर कुमार, रंजन देव, अवनेंद्र प्रकाश, मनोज कुमार सिंह और लीला की थी। राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल एवं व्यवस्थित संचालन के लिए न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, सहायक कर्मियों, ऑर्डरली और अधिकार मित्रों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। सिविल कोर्ट परिसर और गांधी स्टेडियम में हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया था, जहां लोगों को आवश्यक सहायता और जानकारी उपलब्ध कराई गई।