Single Mothers In Bollywood: चकाचौंध भरी ग्लैमर की दुनिया जितनी हसीन दिखती है, इसके पीछे के संघर्ष उतने ही गहरे होते हैं. अक्सर हम पर्दे पर सितारों की सफलता देखते हैं, लेकिन उस सफलता को तराशने के पीछे जिस ‘हाथ’ का सबसे बड़ा योगदान होता है, वो ज्यादातर एक मां का होता है. बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में ऐसी कई एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने निजी जिंदगी में बड़े तूफान झेले, शादियां टूटीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
अमृता सिंह से लेकर श्वेता तिवारी तक, इन ‘सिंगल मदर्स’ ने अकेले अपने दम पर बच्चों की परवरिश की और आज उनके बच्चे इंडस्ट्री के उभरते हुए सितारे हैं. आज हम बात करेंगे उन एक्ट्रेस मांओं की, जिन्होंने खुद को भुलाकर अपने बच्चों को ‘स्टार’ बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की.

90 के दशक की टॉप एक्ट्रेस रहीं अमृता सिंह ने जब सैफ अली खान से शादी की थी, तब वो करियर के शिखर पर थीं. लेकिन शादी के कुछ सालों बाद जब दोनों के रास्ते अलग हुए, उस समय अमृता के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, सारा अली खान और इब्राहिम की परवरिश की.
अमृता ने ग्लैमर की दुनिया से दूरी बना ली और अपना पूरा जीवन बच्चों के नाम कर दिया. उन्होंने न केवल उन्हें बेहतरीन तालीम दी, बल्कि उन्हें जमीन से जुड़े रहना भी सिखाया. आज सारा अली खान जिस शालीनता और आत्मविश्वास के साथ बॉलीवुड में अपनी जगह बना चुकी हैं, उसका पूरा श्रेय वह अपनी मां अमृता को देती हैं. सारा अक्सर कहती हैं, “मेरी मां ही मेरी दुनिया हैं, उन्हीं के संघर्षों ने मुझे मजबूत बनाया है.”

टीवी की ‘प्रेरणा’ यानी श्वेता तिवारी की निजी जिंदगी किसी फिल्म से कम उतार-चढ़ाव भरी नहीं रही. दो असफल शादियों और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों का सामना करने के बावजूद श्वेता कभी टूटी नहीं. उन्होंने अपनी बेटी पलक तिवारी और बेटे रेयांश को अकेले पाला.
श्वेता ने काम करना कभी बंद नहीं किया ताकि वो अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य दे सकें. पलक तिवारी आज बॉलीवुड में डेब्यू कर चुकी हैं और अपनी मां को अपना ‘रोल मॉडल’ मानती हैं. श्वेता तिवारी ने साबित किया कि एक औरत अगर ठान ले, तो वो बिना किसी सहारे के भी अपने बच्चों का भविष्य बना सकती है.
बबिता कपूरकपूर खानदान में एक दौर ऐसा था जब घर की बहू-बेटियों को फिल्मों में काम करने की इजाजत नहीं थी. लेकिन बबिता ने इस परंपरा के खिलाफ जाकर अपनी बेटियों, करिश्मा और करीना कपूर को स्टार बनाने का फैसला किया. रणधीर कपूर से अलग होने के बाद बबिता ने अकेले ही दोनों बेटियों की जिम्मेदारी उठाई.
करिश्मा कपूर का 90 के दशक में नंबर वन एक्ट्रेस बनना और फिर करीना का इंडस्ट्री पर राज करना, बबिता के कड़े अनुशासन और मेहनत का ही नतीजा था. उन्होंने अपनी बेटियों को संघर्ष करना सिखाया और आज ये दोनों बहनें बॉलीवुड की टॉप एक्टेस (अपने समय की) में गिनी जाती हैं.

80 के दशक में बिना शादी के मां बनना समाज में किसी ‘गुनाह’ से कम नहीं माना जाता था. लेकिन नीना गुप्ता ने क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ अपने रिश्ते और बेटी मसाबा की जिम्मेदारी को पूरी निडरता से स्वीकार किया. नीना ने अकेले मसाबा को पाला और आज मसाबा गुप्ता देश की सबसे बड़ी फैशन डिजाइनर्स में से एक हैं. नीना गुप्ता की ये कहानी हर उस महिला के लिए मिसाल है जो समाज के डर से अपने फैसलों से पीछे हट जाती है.

इस लिस्ट में बॉलीवुड के मशहूर एक्ट्रेस कबीर बेदी की बेटी पूजा बेदी का नाम भी शामिल है, जिन्होंने तलाक के बाद अपनी बेटी अलाया एफ को एक स्वतंत्र सोच के साथ पाला. अलाया आज बॉलीवुड की टैलेंटेड एक्ट्रेस में गिनी जाती हैं.
इन सभी एक्ट्रेस की कहानियां बताती हैं कि ‘सिंगल मदर’ होना कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है. इन्होंने न केवल बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, बल्कि उन्हें इस काबिल बनाया कि आज दुनिया उन्हें उनके अपने नाम से जानती है. ये उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो जीवन के कठिन दौर से गुजर रही हैं.