Mothers Day: रसोई से शुरू किया छोटा सा स्टार्टअप… देखते ही देखते इस मां ने खड़ा कर दिया अचार का बड़ा ब्रांड
TV9 Bharatvarsh May 10, 2026 10:43 PM

Mothers Day: आमतौर पर स्टार्टअप इकोसिस्टम में युवाओं की ही चर्चा होती है. माना जाता है कि बिजनेस शुरू करने और रिस्क लेने की एक उम्र होती है. लेकिन, डी2सी (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) मार्केट में बिहार के दरभंगा की रहने वाली कल्पना झा ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है. इस मदर्स डे के मौके पर हम आपको एक ऐसी महिला एंटरप्रेन्योर की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने रिटायरमेंट की उम्र में अपने घर की रसोई से एक ऐसे बिजनेस की नींव रखी, जिसकी धमक आज पूरे देश में है.

नानी-दादी के पारंपरिक नुस्खा बना बिजनेस का आधार

किसी भी सफल प्रोडक्ट की पहली शर्त उसका ‘मार्केट-फिट’ होना है. कल्पना जी के बिजनेस का आइडिया भी कस्टमर के सीधे फीडबैक से निकला. जब भी उनके घर मेहमान आते थे, तो वापसी में उनका एक ही फीडबैक होता था, ‘हमें मिठाई का डिब्बा नहीं, आपके हाथ के अचार की बरनी चाहिए.’ यह एक परफेक्ट प्रोडक्ट वैलिडेशन था. गांवों की नानी-दादी की उसी पुरानी विरासत और ऑथेंटिक स्वाद को उन्होंने अपना यूएसपी (USP) बनाया. शुरुआत में फूड इंडस्ट्री को लेकर उनके मन में झिझक जरूर थी, लेकिन बेहतरीन क्वालिटी के दम पर उनका यह प्रयोग बाजार में हिट साबित हुआ.

6 कर्मचारियों से 75 महिलाओं की मजबूत वर्कफोर्स तक का सफर

किसी भी स्टार्टअप के लिए सबसे मुश्किल दौर होता है उसका ‘स्केल-अप’ करना. कल्पना जी ने कोविड की दूसरी लहर (साल 2020) के बीच सिर्फ 6 महिलाओं के साथ यह काम शुरू किया था. उस अनिश्चितता वाले दौर में बूटस्ट्रैप्ड तरीके (बिना बाहरी निवेश के) से बिजनेस खड़ा करना एक बड़ा चैलेंज था. लेकिन जैसे-जैसे बाजार में झा जी स्टोर के अचार की डिमांड बढ़ी, उन्होंने अपनी सप्लाई चेन और प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ाया. आज यह छोटा सा घरेलू काम एक लीज पर ली गई फैक्ट्री में बदल चुका है, जहां 75 महिलाएं काम कर रही हैं. यह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि रोजगार सृजन का एक शानदार मॉडल भी पेश कर रहा है.

शार्क टैंक इंडिया का मंच बनी ब्रांड की नई पहचान

ब्रांडिंग किसी भी बिजनेस की जान होती है. जब कल्पना झा ‘शार्क टैंक इंडिया’ के मंच पर पहुंचीं, तो निवेशकों (शार्क्स) ने भी उनके बिजनेस मॉडल और विजन की जमकर तारीफ की. ब्रांड का नाम ‘झा जी स्टोर’ रखने के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है. उन्होंने अपने पति के सम्मान में यह नाम रखा, जिन्हें वह ‘झा जी’ कहकर बुलाती हैं. लंबे समय तक पति की सरकारी नौकरी और तबादलों के कारण वह अपना बिजनेस शुरू नहीं कर पाई थीं. लेकिन पति के रिटायर होने के बाद, उनके मजबूत सपोर्ट से ही यह उद्यम जमीन पर उतर सका.

नए उद्यमियों के लिए एक शानदार केस स्टडी

कल्पना झा का यह सफर आज के युवाओं और नए उद्यमियों को एक बड़ा सबक देता है. उनका साफ मानना है कि सिर्फ आइडिया होना काफी नहीं है, एग्जीक्यूशन से पहले एक सॉलिड बिजनेस प्लान होना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही, उन्होंने ई-कॉमर्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस की ताकत को सही समय पर पहचाना. आज डिजिटल युग में अगर आपके प्रोडक्ट में दम है और आपके पास एक मजबूत बिजनेस प्लान है, तो आप दुनिया के किसी भी कोने से अपने ब्रांड को ग्लोबल लेवल तक ले जा सकते हैं. कल्पना झा की यह सफलता साबित करती है कि बिजनेस की दुनिया में हुनर और मजबूत संकल्प के आगे उम्र महज एक नंबर है.

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