Power Bank in Flights: गर्मी की छुट्टियों में हवाई यात्रा की तैयारी कर रहे हैं और साथ में पावर बैंक ले जाने का सोच रहे हैं? तो उड़ान भरने से पहले एयरलाइंस और एविएशन अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों को जान लेना बेहद जरूरी है. हाल के वर्षों में पावर बैंक से जुड़े आग और धुएं के कई मामलों के बाद दुनिया भर की एयरलाइंस ने सुरक्षा नियमों को और सख्त कर दिया है.
सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि लिथियम-आयन बैटरी वाले पावर बैंक को चेक-इन लगेज में नहीं रखा जा सकता. यात्रियों को इन्हें अपने कैरी-ऑन बैग या हैंड बैगेज में ही रखना होगा. इस नियम के पीछे मुख्य कारण सुरक्षा है.
यदि कार्गो होल्ड में रखी बैटरी में कोई खराबी आ जाए और आग लग जाए तो विमान चालक दल तुरंत कार्रवाई नहीं कर सकता. वहीं, केबिन में मौजूद बैटरी पर नजर रखना और किसी आपात स्थिति से निपटना आसान होता है.
सामान्य तौर पर यात्री 100 वॉट-आवर (Wh) तक की क्षमता वाले दो पावर बैंक बिना किसी विशेष अनुमति के विमान में ले जा सकते हैं. इतनी क्षमता वाला पावर बैंक स्मार्टफोन को कई बार चार्ज करने के लिए पर्याप्त होता है.
अगर बैटरी की क्षमता 100Wh से अधिक और 160Wh तक है तो उसे विमान में ले जाने के लिए एयरलाइन की मंजूरी आवश्यक हो सकती है. इस तरह की बैटरियां आमतौर पर पेशेवर वीडियो उपकरणों या मेडिकल डिवाइस में उपयोग की जाती हैं.
कई पावर बैंक पर क्षमता mAh (मिलीएम्पियर-आवर) में लिखी होती है. ऐसे में वॉट-आवर निकालने के लिए एक आसान गणना की जा सकती है.
उदाहरण के लिए:
10,000mAh = 10Ah
10Ah × 3.7V = 37Wh
यानी 10,000mAh का पावर बैंक लगभग 37Wh के बराबर होता है जो विमान यात्रा के लिए तय सीमा के अंदर है.
हाल के वर्षों में लिथियम बैटरियों से जुड़े कई हादसे सामने आए हैं. जनवरी 2025 में दक्षिण कोरिया के एक एयरपोर्ट पर टेकऑफ से पहले एक विमान में आग लग गई थी जिसके बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. ऐसी घटनाओं ने एयरलाइंस और एविएशन एजेंसियों को बैटरी सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क बना दिया है. कई उड़ानों को केवल एहतियात के तौर पर डायवर्ट भी करना पड़ा है क्योंकि बैटरी से जुड़े संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
विशेषज्ञों के अनुसार लिथियम-आयन बैटरियां छोटे आकार में काफी अधिक ऊर्जा स्टोर करती हैं. यदि बैटरी दब जाए, ज्यादा गर्म हो जाए या जरूरत से ज्यादा चार्ज हो जाए तो थर्मल रनअवे प्रोसेस शुरू हो सकता है.
इस स्थिति में बैटरी तेजी से गर्म होने लगती है और जहरीली गैसें तथा आग पैदा कर सकती है. हालांकि ऐसे मामलों की संभावना बहुत कम होती है लेकिन जब ऐसा होता है तो नुकसान गंभीर हो सकता है.
फ्लाइट पर जाने से पहले अपने पावर बैंक की स्थिति जांच लें. यदि उसमें इनमें से कोई संकेत दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल न करें:
विशेषज्ञ सस्ते और अनजान ब्रांड के पावर बैंक खरीदने से भी बचने की सलाह देते हैं क्योंकि उनमें सुरक्षा मानकों की कमी हो सकती है.
फ्लाइट के दौरान पावर बैंक को ओवरहेड बिन में रखने की अनुमति कई एयरलाइंस नहीं देती हैं. इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके जैसे सीट के सामने मौजूद पॉकेट, सीट के नीचे रखा बैग. इससे किसी समस्या की स्थिति में केबिन क्रू तुरंत कार्रवाई कर सकता है.
कई एयरलाइंस यात्रियों को पावर बैंक से अन्य डिवाइस चार्ज करने या विमान के पावर सॉकेट से पावर बैंक चार्ज करने की अनुमति नहीं देतीं. इसलिए यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन के नियम जरूर पढ़ लें.
यदि आपका पावर बैंक या कोई बैटरी वाला उपकरण सीट और दीवार के बीच फंस जाए तो उसे निकालने के लिए सीट को हिलाने या पीछे-आगे करने की कोशिश न करें.
सीट का दबाव बैटरी को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे वह गर्म होकर आग पकड़ सकती है. ऐसी स्थिति में तुरंत केबिन क्रू को सूचित करें क्योंकि उन्हें ऐसे डिवाइस सुरक्षित तरीके से निकालने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
हर एयरलाइन के नियम थोड़े अलग हो सकते हैं. कुछ कंपनियां बैटरियों की संख्या या क्षमता को लेकर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लागू करती हैं. इसलिए फ्लाइट से पहले अपनी एयरलाइन की आधिकारिक गाइडलाइन पढ़ना सबसे सुरक्षित विकल्प है.