सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी से थमेगा ब्लैडर कैंसर, दोबारा बीमारी लौटने का खतरा हुआ बेहद कम
सोनम June 08, 2026 02:12 AM

How Radiation Therapy Helps In Bladder Cancer Treatment: ब्लैडर कैंसर के इलाज में सर्जरी को सबसे प्रभावी तरीकों में से एक माना जाता है, लेकिन कई मरीजों में ऑपरेशन के बाद भी बीमारी दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है. खासतौर पर हाई-रिस्क मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर के मरीजों में यह चुनौती अधिक देखने को मिलती है. ऐसे में एक नए स्टडी ने संकेत दिया है कि सर्जरी के बाद दी जाने वाली रेडिएशन थेरेपी मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है और कैंसर की वापसी के जोखिम को कम कर सकती है. 

कैसे काम करती है रेडिएशन थेरेपी?

 जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी में पब्लिश रिसर्च निष्कर्ष में  एक फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल से सामने आया है. रिसर्चर ने पाया कि ब्लैडर को सर्जरी के जरिए हटाने और कीमोथेरेपी लेने के बाद रेडिएशन थेरेपी कराने वाले मरीजों में कैंसर के दोबारा उसी क्षेत्र में लौटने की संभावना कम रही. स्टडी के अनुसार, रेडिएशन थेरेपी से बीमारी पर बेहतर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है, हालांकि कुल जीवित रहने की दर और बीमारी- मुक्त रहने की अवधि में दिखा सुधार पूरी तरह महत्वपूर्ण नहीं माना गया. 

किन लोगों को रिसर्च में शामिल किया गया?

यह टेस्ट भारत के चार शैक्षणिक चिकित्सा केंद्रों में किया गया, जिसमें नॉन-मेटास्टेटिक मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर से पीड़ित 153 मरीज शामिल थे. इनमें से 71 प्रतिशत मरीजों को सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी गई थी, जबकि करीब 20 प्रतिशत मरीजों ने सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी प्राप्त की. इसके बाद कुछ मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई, जबकि अन्य मरीजों को केवल निगरानी में रखा गया.

क्या निकला इसका रिजल्ट?

रेडियोथेरेपी सर्जरी या अंतिम कीमोथेरेपी सत्र के आठ सप्ताह के भीतर शुरू की गई. लगभग 47 महीने तक मरीजों की निगरानी के बाद रिसर्चर ने पाया कि दो साल तक कैंसर के स्थानीय या आसपास के हिस्सों में दोबारा न लौटने की दर रेडिएशन समूह में 87.1 प्रतिशत रही, जबकि केवल निगरानी वाले समूह में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत था. रिसर्चर ने कहा कि एडजुवेंट पेल्विक इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी ने हाई-रिस्क यूरोथेलियल मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर मरीजों में लोकल कंट्रोल बेहतर किया और इसके साथ गंभीर बुरे प्रभाव में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं देखी गई. यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे सर्जरी के बाद दिए जाने वाले उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहे हैं.

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डिजीज-फ्री सर्वाइवल 71.6 प्रतिशत 

स्टडी में यह भी देखा गया कि रेडिएशन लेने वाले मरीजों में डिजीज-फ्री सर्वाइवल 71.6 प्रतिशत रही, जबकि दूसरे समूह में यह 58.7 प्रतिशत थी. इसी तरह ब्लैडर कैंसर-विशिष्ट सर्वाइवल और ओवरऑल सर्वाइवल के आंकड़े भी रेडिएशन समूह में बेहतर पाए गए.  हालांकि इन परिणामों को स्टेटिकल फॉर्म से निर्णायक नहीं माना गया. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिन मरीजों को पेल्विक रेडिएशन दी गई, उनमें लोकल या क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर की पुनरावृत्ति केवल 7.9 प्रतिशत मामलों में हुई. वहीं, निगरानी वाले समूह में यह दर 25.6 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि रेडिएशन थेरेपी कैंसर को उसी क्षेत्र में वापस आने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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