राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के गेमप्लान में फंसी कांग्रेस, तीसरे उम्मीदवार की एंट्री से क्रॉस वोटिंग का खतरा
Webdunia Hindi June 08, 2026 05:43 PM


मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव में हाईवोल्टेज सियासत शुरु हो गई है। बीजेपी की ओर से तीसरे प्रत्याशी के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारे जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ बीजेपी की ओर से महेश केवट पर दांव लगाने से चुनावी गणित को रोचक बना दिया है। बीजेपी की ओर से महेश केवट की दावेदारी से कांग्रेस के भीतर विधायकों की एक बड़ी टूट को भी हवा दे दी है।

 

बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारकर स्पष्ट संकेत दिया है कि उसे कांग्रेस विधायकों के समर्थन मिलने की पूरी संभावना है। यही वजह है कि अब नजरें कांग्रेस विधायकों पर टिक गई हैं। दरअसल बीजेपी राज्यसभा चुनाव मध्यप्रदेश में बड़ा खेला की तैयारी में है। विधानसभा की वर्तमान सदस्य संख्या के हिसाब से तीसरे उम्मीदवार की  जीत के लिए बीजेपी को कांग्रेस के  8 विधायकों का समर्थन चाहिए होगी, यानि कम से कम कांग्रेस के 8 विधायकों को क्रॉस वोटिग करनी होगी। बीजेपी ने महेश केवट को तीसरी सीट पर उतारकर कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

 

बीजेपी के गेमप्लान में फंस गई कांग्रेस?- मध्यप्रदेश मे रा्ज्यसभा की  तीन सीटों पर चुनाव हो रहे है। राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने जिस तरह से  गेमप्लान बनाया उसमें  कांग्रेस फंस गई  है। विधानसभा की संख्या बल के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में दो सीटें और कांग्रेस के खाते में एक सीट जाना तय माना जा रहा था। इसी समीकरण को देखते हुए बीजेपी ने पहले तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को अपना उम्मीदवार बनाया। बीजेपी की ओर से दो सीटों पर उम्मीदवार घोषित होने के बाद कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया है। 

 

कांग्रेस के मीनाक्षी नटराजन के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कांग्रेस के भीतर अंसतोष के सुर सुनाई पड़ने लगे  है। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से कमलनाथ, जीतू पटवारी,अरूण यादव. कमलेश्वर पटेल जैसे दावेदारों को नकार कर हाईकमान ने जिस तरह से मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा जताया,उससे कांग्रेस के खेमे मे सन्नाटा छा गया है। कमलनाथ जैसे दिग्गज नेताओं की ओर  मीनाक्षी नटराजन को  सोशल मीडिया पर बधाई नहीं देना भी सियासी गलियारों में खूब चर्चा के केंद्र में है। 

ऐसे में बीजेपी ने मौका देखते हुए महेश केवट को रविवार रात अपना उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा दांव चल दिया।  यह और बात है कि 2016 में बीजेपी की ऐसी ही कोशिश नाकाम रही थी। लेकिन इस बार जिस तरह से कमलनाथ और दिग्विजय गुट की नाराजगी की खबरे सामने आ रही  है उससे राज्यसभा चुनाव में बड़ा खेला हो सकता है।

 

कांग्रेस के सामने विधायकों के क्रॉस वोटिंग का खतरा- राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को उतराने  के बाद अब कांग्रेस के सामने विधायकों की क्रॉस वोटिंग का खतरा खड़ा हो गया है। महेश केवट के नामांकन के लिए बीजीप दफ्तर पहुंचे कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि चुनाव लड़ने का  सबको अधिकार है और हमारे पास एक्ट्रा वोट थे, इसलिए अपना उम्मीदवार खड़ा किया है। हमे विश्वास है कि लोग विकास चाहते है और वह चाहते है कि मोदी जी के हाथ मजबूत हो इसलिए राज्यसभा में बीजेपी का बहुमत आम जनता चाहती है, इसलिए इस कारण से लोग बीजेपी उम्मीदवार को अपना समर्थन देंगे।   

 

वहीं कांग्रेस नेता पार्टी में किसी टूट से इंकार कर रहे है। मनीक्षा नटराजन के नामांकन भरने के लिए विधानसभा पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक पूरी तरह एकजुट है और मीनाक्षी नटराजन की जीत होगी। कांग्रेस उम्मीदवार मनीक्षा नटराजन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बीजेपी ने जो तीसरा उम्मीदवार उतारा है,अब यह हमारे  सामने विचारधारा की लड़ाई है जो हमारे नेता राहुल गांधी लड़ रहे है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई पूरी कांग्रेस पार्टी की  और गरिमा की लडाई है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सभी विधायक एकजुट हैं और भाजपा जानबूझकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि उसके विधायकों में कोई असंतोष नहीं है और राज्यसभा चुनाव में पार्टी के सभी सदस्य अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। वह

 

हालांकि राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं का आधार केवल बीजेपी का तीसरा उम्मीदवार उतारना नहीं है। पिछले कुछ समय से कांग्रेस के कुछ विधायकों की नाराजगी और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर असंतोष की खबरें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में बीजेपी ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का प्रयास किया है। केवट समाज से आने वाले महेश केवट की उम्मीदवारी को भाजपा पिछड़े और वंचित वर्गों के बीच अपने प्रभाव को और मजबूत करने की रणनीति के रूप में भी देख रही है।

 

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव केवल सीट जीतने का मामला नहीं होता, बल्कि यह राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन का भी मंच बन जाता है। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी के लिए एक तरह से सियासी लिटमस टेस्ट भी है। अगर बीेजेपी अपने तीसरे उम्मीदवार को जिता ले जाती है, तो पार्टी के नेतृत्व में मोहन का कद बढ़ गया और कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका होगा जाएगा। वहीं यदि कांग्रेस अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने में कामयाब रहती है तो 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस को एक संजीवनी मिल जाएगाी।

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