45 डिग्री की तपिश, 7 दिन से सूखे नल! बांदा में 5000 लोग बूंद-बूंद पानी को तरसे
TV9 Bharatvarsh June 11, 2026 02:43 AM

Banda Water Crisis: उत्तर प्रदेश का बांदा जिला एक ओर भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तापमान के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. वहीं दूसरी ओर, शहर के कई मोहल्लों में पेयजल संकट ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है. चिल्ला रोड स्थित सर्वोदय नगर, इंदिरा नगर तथा वार्ड संख्या 31 और 16 के हजारों निवासी पिछले सात दिनों से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. लगभग पांच हजार की आबादी इस गंभीर संकट से जूझ रही है, लेकिन जल संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा.

स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र की जलापूर्ति जमालपुर बोरिंग ट्यूबवेल से की जाती है. किसी तकनीकी खराबी अथवा लापरवाही के चलते सर्वोदय नगर स्थित जलाशय और कुएं तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. परिणामस्वरूप इंदिरा नगर और आसपास के क्षेत्रों की जलापूर्ति भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है. घरों के नल सूखे पड़े हैं, महिलाएं और बच्चे दूर-दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं.

सात दिन से नहीं मिल रहा पानी

सबसे चिंताजनक बात यह है कि भीषण गर्मी के इस दौर में जल संकट की शिकायतें लगातार किए जाने के बावजूद जल संस्थान के अधिकारियों ने समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है. क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि जल संस्थान के अधिशासी अभियंता और महाप्रबंधक जनता की परेशानी से बेखबर गहरी निद्रा में सोए हुए हैं. जब जनता पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है, तब जिम्मेदार विभाग केवल कागजी व्यवस्थाओं में व्यस्त दिखाई दे रहा है.

लोगों में भारी गुस्सा

क्षेत्र के निवासी सुरेश, गुड्डन, राजू सिंह विश्वकर्मा, बिट्टन सोनी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते जलापूर्ति बहाल नहीं की गई तो क्षेत्रवासी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे. लोगों का कहना है कि सरकार हर घर जल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर के बीचोंबीच हजारों लोग पानी के लिए भटक रहे हैं.

आंदोलन करने की दी चेतावनी

लोगों का सवाल है कि जब गर्मी अपने चरम पर है और तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है, तब जल संस्थान आखिर किस दिन अपनी जिम्मेदारी निभाएगा? क्या किसी बड़े जनआक्रोश या आंदोलन का इंतजार किया जा रहा है? सात दिनों से प्यासे बैठे हजारों लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और जल संस्थान इस गंभीर समस्या पर कब जागते हैं और कब लोगों को राहत मिलती है.

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