AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वोटर वेरिफिकेशन प्रोसेस को लेकर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. उन्होंने उन क्राइटेरिया पर सवाल उठाए हैं जिनके तहत कुछ एंट्रीज़ को कथित तौर पर 'विसंगति' (Anomalies) के तौर पर मार्क किया जा रहा है. पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि बड़े परिवारों को शक की नज़र से नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो घर में बच्चों या परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर वोटिंग के अधिकार को रोकता हो. ओवैसी ने कहा कि वोटर वेरिफिकेशन के दौरान सिर्फ़ परिवार के आकार को जांच-पड़ताल या लिस्ट से नाम हटाने का आधार नहीं बनाया जा सकता.
उम्र के अंतर के मामले पर क्या बोले ओवैसी
हैदराबाद के सांसद ने चुनावी रिकॉर्ड में उम्र के अंतर (age-gap) से जुड़ी विसंगतियों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पुरानी वोटर लिस्ट कई बार हाथ से तैयार की जाती थीं और उन रिकॉर्ड में हुई किसी भी गलती को असली वोटर्स पर सवाल उठाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, अधिकारियों को ऐसे मामलों को ‘विसंगति’ की कैटेगरी में डालने से पहले उनकी सावधानीपूर्वक समीक्षा करनी चाहिए.
ओवैसी ने लोगों से क्या की अपील
ओवैसी ने नागरिकों से यह भी अपील की कि वे डॉक्यूमेंटेशन की ज़रूरतों पर ध्यान दें, वेरिफिकेशन फ़ॉर्म समय पर जमा करें और भविष्य में होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए अपने रिकॉर्ड को अपडेट रखें. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चुनावी डॉक्यूमेंटेशन का सीधा संबंध पहचान और लोकतांत्रिक भागीदारी से है, इसलिए वोटर्स के लिए यह ज़रूरी है कि वे इस प्रोसेस को सही ढंग से पूरा करें और वेरिफिकेशन प्रोसेस के दौरान पूरी जानकारी रखें.
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