Jaisalmer News: भारत-पाक सरहद पर बसा तनोट, जहां मौजूद तनोट माता के मंदिर के चमत्कारों से हर कोई वाकिफ है. भारत-पाक युद्ध के साथ ही ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन के मंसूबों को नाकाम करने वाली इस तनोट माता को नेता-अभिनेता के साथ ही हर कोई जानता है. वहीं तनोट में तनोट माता के मंदिर के सामने ही मौजूद विद्या की देवी सरस्वती के मंदिर को जिला प्रशासन द्वारा धराशायी कर दिया गया है.
सरहद पर मौजूद देश के इस सबसे पहले विद्यालय को धराशायी करने से लोगों में काफी आक्रोश है और तनोट के ग्रामीण जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे है. तनोट में 1990 से संचालित 5वीं कक्षा तक के इस विद्यालय को 2 साल पहले ही 8 वी तक क्रमोन्नत किया गया था. वहीं रविवार को इस विद्यालय की बिल्डिंग पर प्रशासन का पीला पंजा चल चुका है. अब यहां पर्यटकों के लिए कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा.
20 किलोमीटर की दूरी तक नहीं है स्कूलग्रामीणों का आरोप है सरकार जहां सरहद को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती है. वही सरहद के शिक्षा के स्तर के सुधार को लेकर कोई काम नहीं कर रही है. विकास के नाम पर विनाश को न्योता दिया जा रहा है. वहीं तनोट क्षेत्र के आस-पास में कोई निजी विद्यालय नहीं है. करीब 20 किलोमीटर के इस रेतीले इलाके में 1 मात्र ये सरकारी विद्यालय संचालित था. राज्य भर में 1 जुलाई से विद्यालय खुलेगे. ऐसे में तनोट में कोई दूसरा विद्यालय न होने और धराशायी विद्यालय की जगह कोई वैकल्पिक विद्यालय न होने से आखिर तनोट के नोनिहालो का क्या होगा?
अधिकारियों ने सवालों से झाड़ा पल्लाउनकी शिक्षा को लेकर आखिर प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगा या नहीं? इन सवालों को लेकर जब हमने शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों से बात करने की कोशिश की तो वे पल्ला झाड़ते हुए जिला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CO) के आदेशों का हवाला देते दिखे. वही कैमरे के सामने बयान देने से बचते दिखे.