12 साल में सातवीं बार फ्रांस जा रहे पीएम मोदी, आखिर भारत के लिए इतना खास क्यों है ये देश?
TV9 Bharatvarsh June 12, 2026 04:43 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस के दौरे पर रहेंगे. 2014 में सत्ता संभालने के बाद यह उनकी फ्रांस की सातवीं आधिकारिक यात्रा होगी. सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या है जो फ्रांस को भारत की विदेश नीति में इतना महत्वपूर्ण बनाता है? दरअसल, भारत और फ्रांस का रिश्ता सिर्फ दो देशों के बीच सामान्य कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है. ये भरोसे, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे के समर्थन की कहानी है. यही वजह है कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भी पेरिस और नई दिल्ली लगातार करीब आते गए हैं.

मोदी के दौरे का एजेंडा क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ 14 जून को मुलाकात और द्विपक्षीय बातचीत करेंगे, जो दोनों देशों के स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बनने के बाद हो रही है. पीएम मोदी फ्रांस के नीस शहर में आयोजित भारत इनोवेट्स कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जहां भारत और फ्रांस के 120 से अधिक स्टार्टअप, निवेशक और तकनीकी कंपनियां हिस्सा लेंगी.

जी7 सम्मेलन में कई सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के एवियों में आयोजित G7 में शामिल होंगे. भारत को हालांकि सभी G7 सम्मेलन का न्योता दिया जाता था और भारत सम्मेलन के आखिरी दिन G 7 Plus के लिए आयोजित सत्र में ही भाग लेता था लेकिन इस बार का मामला काफी अलग है. जी7 का मेम्बर नहीं होने पर भी फ़्रांस ने भारत को जी7 के सभी ट्रैक्स में शामिल रखा है जो अपने आप में अनूठा है.
इसके अलावा वे पेरिस में यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी सम्मेलन VivaTech को संबोधित करेंगे.

जब दुनिया ने भारत से दूरी बनाई, तब फ्रांस साथ खड़ा रहा. भारत और फ्रांस के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत विश्वास है. 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया. इसके बाद अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए. लेकिन फ्रांस उन चुनिंदा देशों में शामिल था जिसने भारत को अलग-थलग करने की नीति का समर्थन नहीं किया.

फ्रांस ने भारत के साथ संवाद जारी रखा और भारत की सामरिक चिंताओं को समझने की कोशिश की. यही वह दौर था जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव मजबूत हुई. इसी साल भारत और फ्रांस ने रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की थी. दिलचस्प बात ये है कि यह भारत की किसी पश्चिमी देश के साथ पहली रणनीतिक साझेदारी थी और फ्रांस की किसी गैर-पश्चिमी देश के साथ पहली ऐसी साझेदारी थी.

संयुक्त राष्ट्र में भारत का सबसे मजबूत समर्थक

फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से एक है और लंबे समय से भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता रहा है. कश्मीर से लेकर आतंकवाद तक, कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर फ्रांस ने भारत की चिंताओं को समझा और उसका खुलकर समर्थन किया. फ्रांस ने भारत की सदस्यता के लिए MTCR, Wassenaar Arrangement और Australia Group जैसे महत्वपूर्ण निर्यात नियंत्रण समूहों में भी खुलकर समर्थन किया.

राफेल: भरोसे का सबसे बड़ा प्रतीक

भारत-फ्रांस संबंधों की सबसे चर्चित पहचान राफेल लड़ाकू विमान हैं. भारतीय वायुसेना के लिए खरीदे गए 36 राफेल विमान और भारतीय नौसेना के लिए हाल में हुए राफेल-एम सौदे ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई दी है. हालांकि, भारत चाहता है कि राफेल जेट में भारत अपने हथियारों को फिट कर सके जिस पर नए डील में बातचीत हो रही है.

Tv9 को फ्रांस के एक डिप्लोमेटिक सोर्स ने कहा कि राफेल को लेकर नई डील पुरानी डील से बेहतर होगी. कहानी सिर्फ राफेल तक सीमित नहीं है. स्कॉर्पीन पनडुब्बियां, मिसाइल तकनीक, हेलीकॉप्टर इंजन और अब रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन तक सहयोग पहुंच चुका है. भारत और फ्रांस ने 2024 में रक्षा औद्योगिक रोडमैप भी अपनाया, जिसके तहत दोनों देश रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन पर काम कर रहे हैं.

अंतरिक्ष से परमाणु ऊर्जा तक गहरी साझेदारी

भारत और फ्रांस का सहयोग सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं है. इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES के बीच छह दशक पुराना सहयोग है. मेघा-ट्रॉपिक्स, SARAL और गगनयान जैसे कार्यक्रमों में दोनों देशों ने साथ काम किया है. परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी फ्रांस भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है. छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और उन्नत परमाणु तकनीक पर दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है.

यूरोप में भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार

आज फ्रांस यूरोपीय संघ में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. पिछले दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना होकर लगभग 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. डिजिटल सहयोग का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूरोप में UPI को अपनाने वाला पहला देश फ्रांस बना. इसकी शुरुआत एफिल टॉवर से हुई थी.

सिर्फ रक्षा नहीं, नई साझेदारी का दौर

पीएम मोदी के इस दौरे की खास बात यह है कि इसका केंद्र केवल रक्षा या रणनीतिक सहयोग नहीं है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्टार्टअप, ब्लू इकोनॉमी, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, छात्र आदान-प्रदान और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों को नई प्राथमिकता दी जा रही है. 2026 को दोनों देशों ने इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन के रूप में भी घोषित किया है.

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