Somvati Amavasya 2026 Date: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की शांति, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है, जिसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस साल 15 जून 2026 को पड़ रही सोमवती अमावस्या खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इस दिन मिथुन संक्रांति का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह विशेष महासंयोग लगभग 396 साल बाद बना है, जिससे इस तिथि का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है.
396 साल बाद बना है दुर्लभ संयोगज्योतिषाचार्यों के अनुसार , सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का यह विशेष संयोग बहुत ही दुर्लभ माना जा रहा है. बताया जाता है कि ऐसा योग पिछली बार 10 जून 1630 को बना था. अब 15 जून 2026 को यह महासंयोग दोबारा बन रहा है और इसके बाद अगली बार यह अवसर 20 जून 2327 में देखने को मिलेगा. इसी वजह से इस दिन किए गए धार्मिक कामों का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में अधिक माना जा रहा है.
शाम की पूजा का भी है विशेष महत्वअधिकतर लोग अमावस्या पर सुबह स्नान, तर्पण और पूजा करते हैं, लेकिन सोमवती अमावस्या की शाम को भी विशेष पूजा का विधान बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोधूलि बेला में किया गया पूजन भगवान शिव और पितरों दोनों को प्रसन्न करता है. पंचांग के अनुसार, 15 जून 2026 को गोधूलि बेला का शुभ समय शाम 7 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. इस दौरान पूजा करना फलदायी होगा.
सोमवती अमावस्या पर मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़. Photo: PTI
शाम की पूजा के समय क्या करें?सोमवती अमावस्या की शाम को सबसे पहले दीपक जलाकर भगवान शिव, माता पार्वती का ध्यान करें. शिवलिंग पर जल अर्पित करें और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. गोधूलि बेला में पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल या घी का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है. कई स्थानों पर पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने की परंपरा भी है. मान्यता है कि इससे पितृ दोष से राहत मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. शाम के समय जरूरतमंद लोगों को कपड़ों या धन का दान करना भी बहुत पुण्यकारी माना जाता है.
शाम की पूजा के समय क्या न करें?सोमवती अमावस्या की शाम को क्रोध, विवाद और किसी को कोई गलत बात बोलने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया नकारात्मक व्यवहार पूजा के शुभ प्रभाव को कम कर सकता है. इस दिन पूजा के समय घर में अंधेरा नहीं रखना चाहिए. गोधूलि बेला में दीपक अवश्य जलाएं और पूजा स्थल को साफ रखें. इस दिन मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है. पितरों के लिए किए जाने वाले कांमों का मजाक उड़ाना या उनका अनादर करना भी अशुभ माना जाता है. साथ ही किसी जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाना भी इस दिन उचित नहीं माना जाता है इसलिए हो सकता है तो उसे कुछ न कुछ दान जरूर करें.
ये भी पढ़ें: अधिकमास अमावस्या और सूर्य संक्रांति का महासंयोग, 15 जून से इन 3 राशियों पर होगी धनवर्षा!
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.