Cyber Fraud: आजकल मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल और मैसेज तक सीमित नहीं है. यही नंबर आपके बैंक खाते, UPI ऐप्स, सोशल मीडिया प्रोफाइल, ईमेल और कई ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ा होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आपने बंद कर दिया है वह कुछ ही महीनों बाद किसी दूसरे व्यक्ति को आवंटित किया जा सकता है? ऐसे में आपकी निजी जानकारी और ऑनलाइन अकाउंट्स खतरे में पड़ सकते हैं.
जब कोई ग्राहक अपना मोबाइल नंबर बंद कर देता है या लंबे समय तक उसका इस्तेमाल नहीं करता तो टेलीकॉम कंपनियां एक निश्चित अवधि के बाद उस नंबर को दोबारा किसी नए ग्राहक को जारी कर देती हैं. आमतौर पर यह प्रोसेस 45 से 90 दिनों के भीतर पूरी हो सकती है.
समस्या तब पैदा होती है जब लोग अपना नंबर बदलने के बाद भी उसे बैंक, ईमेल, सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन सेवाओं में अपडेट नहीं करते. ऐसे में नया नंबर धारक अनजाने में या जानबूझकर आपके अकाउंट से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकता है.
अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करती हैं. इसमें लॉगिन या पासवर्ड बदलने के दौरान आपके मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाता है.
अगर आपका पुराना नंबर किसी दूसरे व्यक्ति को मिल चुका है और वह अभी भी आपके अकाउंट से जुड़ा है तो पासवर्ड रीसेट लिंक, OTP और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश उसी व्यक्ति तक पहुंच सकते हैं. इसका मतलब है कि आपके ईमेल, सोशल मीडिया या बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बनाने का रास्ता खुल सकता है.
हर साल लाखों मोबाइल नंबर इनएक्टिव होते हैं और बाद में दोबारा जारी किए जाते हैं. डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के कारण यह समस्या और गंभीर होती जा रही है.
साइबर अपराधी अक्सर ऐसे नंबरों का फायदा उठाकर अकाउंट टेकओवर जैसी धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं. यदि किसी अकाउंट की रिकवरी प्रक्रिया पुराने नंबर पर निर्भर है तो जोखिम और बढ़ जाता है.
अपने ईमेल, बैंकिंग ऐप, UPI सेवाओं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य जरूरी अकाउंट्स में लॉगिन करके देखें कि कौन-सा मोबाइल नंबर जुड़ा हुआ है.
जहां भी पुराना नंबर दर्ज है, वहां अपने वर्तमान मोबाइल नंबर को अपडेट करें.
सिर्फ नया नंबर जोड़ना पर्याप्त नहीं है. पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है ताकि भविष्य में कोई जोखिम न रहे.
सिर्फ OTP पर निर्भर रहने के बजाय ऑथेंटिकेटर ऐप्स का उपयोग करें. ये ऐप्स आपके डिवाइस पर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं और मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं होते.
यह सुनिश्चित करें कि आपका पुराना नंबर किसी अकाउंट की बैकअप संपर्क जानकारी या रिकवरी विकल्प के रूप में दर्ज न हो.
मोबाइल नंबरों की संख्या सीमित होती है इसलिए टेलीकॉम कंपनियां पुराने नंबरों को दोबारा जारी करती हैं. यह प्रक्रिया भविष्य में भी जारी रहेगी. ऐसे में अपनी डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी आपको खुद उठानी होगी.
यदि आपने हाल ही में नंबर बदला है या कोई पुराना नंबर इस्तेमाल करना बंद कर दिया है तो आज ही अपने सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच करें. थोड़ी-सी लापरवाही आपके बैंक खाते, ईमेल और सोशल मीडिया प्रोफाइल को खतरे में डाल सकती है.
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