Unused Apps Risk: हमारे फोन में जितनी ऐप्स होती हैं, उनमें से हम कुछ ही रेगुलर यूज कर पाते हैं. सालभर पहले किसी काम के लिए इंस्टॉल किए गए ऐप्स अब तक फोन में इंस्टॉल्ड है भले ही उसे कभी दोबारा ओपन ही न किया गया हो और ऐसी एक नहीं कई ऐप्स हो सकते हैं. ज्यादातर लोग ऐप्स डाउनलोड कर भूल जाते हैं और उन्हें कभी यूज नहीं करते. कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि अनयूज्ड ऐप्स बड़ी मुसीबत का कारण बन सकते हैं. गूगल इसके खतरे जानता है, इसलिए अब यूजर के लिए एक नई अपडेट लेकर आ रहा है.
कैसे खतरा बन जाते हैं पुराने अनयूज्ड ऐप्स?
ऐप्स के पुराने होने का मतलब वर्षों से नहीं होता. यूट्यूब और फेसबुक जैसी ऐप्स को हम वर्षों से यूज करते आ रहे हैं. समय के साथ-साथ ये ऐप्स अपडेट भी होते रहते हैं. खतरा तब पैदा होता है, जब डेवलपर्स ऐप को अपडेट करना बंद कर देते हैं या गूगल उन्हें प्ले स्टोर से हटा देता है. ऐसे ऐप्स फोन के सिस्टम के साथ अपग्रेड नहीं हो पाते और इन्हें हैक करना आसान हो जाता है. डेवलपर्स के हाथ खड़े कर देने के बाद इन ऐप्स को अपग्रेड करने वाला भी कोई नहीं होता और हैकर्स के लिए इसकी सुरक्षा खामियों का फायदा उठाना बाएं हाथ का खेल बन जाता है.
पर्याप्त नहीं है गूगल का मौजूदा सिस्टम
अभी ऐप्स को स्कैन करने के लिए गूगल का प्ले प्रोटेक्ट काम करता है. यह डिवाइस को स्कैन कर खतरे वाली ऐप्स को ब्लॉक कर देता है. अगर कोई ऐप आपके क्रेडेंशियल चोरी करता हुआ या परमिशन के अलावा कोई डेटा या फाइल एक्सेस करते हुए पाया जाता है तो यह यूजर को नोटिफाई कर देता है. इसकी मदद से खतरनाक ऐप्स को डिटेक्ट किया जा सकता है, लेकिन यह डिलिस्टेड या डेवलपर्स की तरफ से अपग्रेड न होने वाली ऐप्स को डिटेक्ट नहीं कर पाता. अब गूगल इस गैप को भरने जा रहा है.
अब गूगल करेगी यह काम
अब गूगल यूजर्स को उन ऐप्स के बारे में भी नोटिफाई करेगा, जिन्हें प्ले स्टोर से हटाया जा रहा है. इसके लिए एक नया फीचर टेस्ट किया जा रहा है. इसके अवेलेबल होने के बाद फोन में इंस्टॉल्ड किसी ऐप को अगर प्ले स्टोर से हटाया जाएगा तो गूगल नोटिफिकेशन के जरिए यूजर को इसकी जानकारी दे देगा. इस जानकारी के आधार पर यूजर को ऐप को रखने या डिलीट करने का फैसला ले सकता है.
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