Main Vaapas Aaunga के वो 5 सीन, जिसमें दर्द, सुकून और प्यार कूट-कूटकर भरा है!
TV9 Bharatvarsh June 16, 2026 01:43 PM

Main Vaapas Aaunga: कुछ कहानियों की सुंदरता बॉक्स ऑफिस कलेक्शन तय नहीं कर सकता है. बेशक फिल्में कमाई में कहीं न टिकती हों, पर लॉन्ग टर्म इन पिक्चरों की वजह से ही भारतीय सिनेमा को याद किया जाएगा. जिस दर्द भरी, पर सुकून देने वाली फिल्म की यहां बात हो रही है, वो इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’ है. जिसमें नसीरुद्दीन शाह ने जो जबरदस्त काम किया है, उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है. वहीं, वेदांग रैना और शरवरी वाघ ने अपने-अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. साथ ही दिलजीत दोसांझ भी इस फिल्म का हिस्सा हैं. दरअसल नीचे काफी स्पॉइलर्स मिलने वाले हैं, तो अपने रिस्क पर ही पढ़िएगा. आज बात इस फिल्म के पांच बेस्ट सीन्स की करेंगे, जिनमें ‘जिया’ को मिलने से लेकर एक इजाजत के लिए अटकी हुई आखिरी सांस तक शामिल है.

‘मैं वापस आऊंगा’ की कहानी में जितना दर्द है, उतना ही सुकून भी यह फिल्म आपको देती है. साथ ही प्यार का एक अलग मतलब सिखाती है. जिन दो लोगों को विभाजन ने अलग कर दिया, पर आखिरी सांस तक अलग न कर पाया.

फिल्म के 5 बेस्ट सीन

1. इस फिल्म का सबसे पहला खूबसूरत सीन है वेदांग रैना और शरवरी वाघ के बीच. जिसमें आपको प्रेम के साथ वादा भी नजर आएगा. जब ईशर सिंह ग्रेवाल (वेदांग रैना) अपने हाथ में अफसाना (शरवरी) का नाम लिखवा लेता है. यह नाम सिर्फ प्रेम के लिए नहीं लिखवाया गया, उस वादे के साथ लिखा, जो बताता है कि मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूंगा. और जब तक उन्हें जिया यानी अफसाना से इजाजत नहीं मिलेगी, वो कहीं नहीं जाएंगे.

2. भारत-पाकिस्तान विभाजन का दर्द आज भी लोग बयां करते हैं. खासकर वो परिवार, जिनके घर बॉर्डर पार रह गए. जिन्होंने अपने परिवार खो दिए. ऐसा ही एक सीन फिल्म में है, जब नसीरुद्दीन शाह का परिवार महिलाओं को किसी के भरोस छोड़कर भारत चले जाते हैं. पर उसके बाद महिलाओं को वहां के लोग मारने आ जाते हैं. उनके साथ अत्याचार होते हैं. ऐसे में नसीरुद्दीन शाह के किरदार की दादी घर की सभी लड़कियों के एक-एक कर गले काट देती हैं. ताकी और खराब हालात से न गुजरना पड़े.

3. फिल्म की शुरुआत में एक सीन है, जब नसीरुद्दीन शाह अपने ड्राइवर को लाहौर जाने को कहते हैं और वो भूल चुके हैं कि विभाजन हो चुका है. दोनों देशों की बॉर्डर है और पाकिस्तान जाना अब मुमकिन नहीं. उनका परिवार पाकिस्तान के सरगोधा में रहता था और बस उन्हें कुछ याद है, तो वो है ‘जिया’… जिस लड़की से प्रेम किया और वो इजाजत लेना चाहते हैं जाने की. पर यह याद ही नहीं कि सब बदल चुका है.

वेदांग रैना और शरवरी वाघ

4. ‘मैं वापस आऊंगा’ में कई इमोशनल और दर्द देने वाले सीन हैं, पर जब अपने दादाजी यानी नसीरुद्दीन शाह के लिए दिलजीत सरगोधा पहुंचते हैं. तो वो आपको प्रेम की एक नई परिभाषा भी बताता है और दुख भी देता है. जी हां, उन्होंने अफसाना (शरवरी) से वादा किया था कि बिना इजाजत के कहीं नहीं जाएंगे. ऐसे में अपने आखिरी वक्त पर भी वो सिर्फ उसे देखना चाहते हैं. जब फोन में अपनी अफसाना को देखते हैं, तो मानो उस शख्स ने जन्नत पा ली. लेकिन वो शख्स यह नहीं जानता कि उस लड़की ने सालों उसका इंतजार किया और फिर चल बसी, पर वो नहीं आया.

5. विभाजन के बाद न सिर्फ सिख परिवारों को पाकिस्तान से जाने को कहा गया. कई मुस्लिम फैमिली को भी नुकसान हुआ. फिल्म में एक सीन है, जहां कुछ सालों बाद वेदांग का किरदार पाकिस्तान जाता है अपनी अफसाना से मिलने. वहां जैसे ही उसे पता लगता है कि उस लड़की की शादी हो गई है. वो उससे बिना मिले चला जाता है और कहता है- यहां वापस नहीं देखना. यह जानने के बाद भी कि उस लड़की के पास जिंदा रहने के लिए शादी के अलावा कोई रास्ता नहीं था.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.