
कोलकाता, 16 जून . पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की Police ने नकली लॉटरी रैकेट का भंडाफोड़ किया और इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया. जिले के एक वरिष्ठ Police अधिकारी ने Tuesday को यह जानकारी दी.
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान शक्ति यादव और गणेश साव के तौर पर हुई है, जो पुरुलिया जिले के नेतुरिया Police स्टेशन इलाके के अमडांगा और रानीपुर गांवों के रहने वाले हैं.
Police के मुताबिक, शक्ति लॉटरी बेचने का काम करता था, जबकि गणेश नकली लॉटरी नेटवर्क का मुख्य सप्लायर था. गिरफ्तारी से पहले दोनों करीब एक साल से फरार चल रहे थे. एक आरोपी के घर की तलाशी लेने पर 10.42 लाख रुपए नकद बरामद हुए.
दोनों को रघुनाथपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उन्हें पांच दिन की Police कस्टडी में भेज दिया.
Police ने बताया कि 23 अप्रैल को नकली लॉटरी का कारोबार चलाने के आरोप में दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था. उस दौरान बड़ी संख्या में लॉटरी टिकट और 22,000 रुपए नकद बरामद हुए थे. उस मामले का मुख्य आरोपी तब से फरार था.
हाल ही में, जानकारी मिलने पर जांचकर्ताओं ने गणेश को गिरफ्तार किया. उससे पूछताछ के बाद नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान हुई, जिसके बाद शक्ति को पकड़ा गया.
अधिकारियों ने बताया कि जिले में लंबे समय से अवैध लॉटरी का काम चल रहा है. इससे पहले, जिला Police और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) ने कई बार छापेमारी की और कई लोगों को गिरफ्तार किया.
जांच में पड़ोसी राज्य Jharkhand के लोगों से भी संबंध होने की बात सामने आई है और Police ने मौजूदा मामले में भी इसी तरह के अंतर-राज्यीय कनेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया है.
Police के अनुसार, आरोपी असली पेपर लॉटरी जैसे दिखने वाले नकली लॉटरी टिकट छापते थे, जिससे उनमें फर्क करना मुश्किल होता था. असली टिकटों की तुलना में नकली टिकटों से बेचने वालों को काफी ज्यादा कमीशन मिलता था, जिससे पकड़े जाने से बचने के लिए इस रैकेट का विस्तार ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में किया गया.
शुरुआती जांच से पता चला है कि नकली टिकट स्थानीय विक्रेताओं तक पहुंचने से पहले एक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए फैलाए जाते थे. शक्ति यादव भी नेतुरिया इलाके में डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर शामिल था और इस प्रक्रिया में अनजान खरीदारों को धोखा दिया जाता था.
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डीकेएम/डीकेपी