Ramayana’s Maya Sita Mystery: रामायण एक पवित्र हिंदू धर्म ग्रंथ है. रामायण में भगवान राम के जीवन की लीलाओं और त्रेतायुग की सभी घटनाओं का वर्णन विस्तार पूर्वक किया गया है. रामायण के अनुसार, माता सीता के हरण के साथ ही रावण ने अपने अंत की कहानी लिख दी थी, जिसके बाद भगवान राम ने रावण का वध किया और धरती पर पुन: धर्म की स्थापना की.
रावण ने पंचवटी में माता सीता का हरण किया, लेकिन क्या उसने असली माता सीता का हरण किया था और क्या माता सीता की अग्नि परिक्षा भी सिर्फ एक दिवाखा थी? आइए रामायण के इस सबसे बड़े रहस्य के बारे में विस्तार से जानते हैं.
पुराणों के अनुसार…रामायण की कुछ परंपराओं, रामचरितमानस और कई पुराणों के अनुसार, पंचवटी में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास के दिन बिना रहे थे. एक दिन भगवान राम को आभास हो गया कि समय का बड़ा खेल शुरू होने वाला है, जिसके बाद उन्होंने माता सीता से कहा, ‘सुनहु प्रिया ब्रत रुचिर सुसीला, मैं कछु करबि ललित नरलीला।। तुम पावक महुँ करहु निवासा। जौ लगि करौं निसाचर नासा।।’
अर्थात श्रीराम ने हंसकर माता सीता स कहा कि हे प्रिय! सुनो अब मैं एक सुंदर मानव लीला करने जा रहा हूं. जब तक मैं असुरों का नाश नहीं कर देता तब तक तुम अग्नि में निवास करो. इसके बाद भगवान राम ने अग्नि देव का स्मरण किया. अग्नि देव प्रकट हुए, तब प्रभु राम ने उनसे कहा कि हे अग्नि देव! कुछ समय के लिए सीता को अपनी पवित्र अग्नि में सुरक्षित रख लीजिए. अग्नि देव ने भगवान की आज्ञा मान ली.
माया सीता हुईं प्रकटइसके बाद उसी क्षण माता सीता अग्नि देव की दिव्य सुरक्षा में चली गईं. फिर उनके स्थान पर प्रकट हुईं माया सीता. एक ऐसी प्रतिछाया जो बिल्कुल माता सीता जैसी दिखती थी. उनका स्वरूप और व्यवहार सबकुछ एक जैसा था, लेकिन वो असली माता सीता नहीं थीं. फिर नियति का खेल शुरू हुआ और रावण ने जिस सीता का हरण किया वो माया सीता थीं. यानी लंका तक कभी असली माता सीता पहुंची ही नहीं.
रावण को लगता रहा कि उसने सीता जी का हरण कर लिया है, लेकिन पूरे लंका युद्ध के दौरान माता सीता अग्नि देव की सुरक्षा में थीं. फिर आया वो क्षण जिसे आज भी लोग अग्नि परीक्षा के नाम से जानते हैं. रावण का अंत होने के बाद माता सीता को अशोक वाटिका से लाया गया तब भगवान ने माता सीता से अग्नि में प्रवेश करने को कहा. इसके बाद जैसे ही माता सीता अग्नि में प्रवेश किया माया सीता अग्नि में वीलीन हो गईं.
संसार को पता चला रहस्यफिर अग्नि देव असली माता सीता को लेकर प्रकट हुए. तब अग्नि देव ने माता सीता पूरी तरह पवित्र होने की घोषणा की. उस क्षण संसार को माया सीता और वास्तविक सीता का रहस्य भी पता चला. यानी अग्नि परीक्षा संदेह की परीक्षा नहीं थी, बल्कि माता सीता की पवित्रता और दिव्यता को पूरे संसार के सामने स्थापित करने का क्षण था.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.