श्रद्धालुओं की ओर से दान दी गई रकम की चोरी की सूचना आम होने के बाद से ही श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र की चर्चा हो रही है. आरोप है कि दान की रकम की गणना में लगे कर्मचारियों ने ही बड़ी राशि की चोरी की है. कुल कितनी रकम चोरी हुई है, इसकी कोई भी जानकारी ट्रस्ट ने अभी तक सार्वजनिक नहीं की है. न ही इस सिलसिले में कोई FIR दर्ज कराई गई है. ट्रस्ट की सिफारिश पर राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए लखनऊ मण्डल के कमिश्नर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन तो कर दिया है लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
आइए, इसी बहाने जानते हैं कि वर्तमान में श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य कौन-कौन हैं? कब और कैसे हुआ था इसका गठन?
राम मंदिर ट्रस्ट में हैं 15 सदस्यअयोध्या के श्री राम मंदिर ट्रस्ट का नाम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र है. इस ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं. इनमें नौ स्थायी और छह नामित सदस्य शामिल हो सकते हैं. ट्रस्ट की वेबसाइट पर दर्ज सूचना के मुताबिक इस समय कुल 14 पदाधिकारी हैं.
ट्रस्ट का गठन कब और कैसे हुआ?
राम मंदिर ट्रस्ट का गठन 4 फरवरी 2020 को हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इसकी घोषणा की थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राम मंदिर ट्रस्ट गठन के लिए तीन महीने का समय दिया था. प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा खत्म होने से चार दिन पहले घोषणा कर दी. सरकार ने ट्रस्ट स्थापना से संबंधित गजट अधिसूचना जारी कर दी. ट्रस्ट को केंद्र की ओर से 67 एकड़ जमीन सौंपी गई. ट्रस्ट मंदिर निर्माण से जुड़े सभी विषयों पर पूरी तरह स्वतंत्र निर्णय ले सकता है, ऐसी व्यवस्था की गई है.
ट्रस्ट को पहला दान एक रुपये मिलाकेंद्र सरकार ने ट्रस्ट को एक रुपया नकद दिया, जो ट्रस्ट का पहला दान था. इसके बाद भारतीय जनता पार्टी एवं सहयोगी संगठनों ने मंदिर निर्माण में दान के लिए लोगों का आह्वान किया. कई लोगों ने बड़ी रकम तो सामान्य लोगों ने भी अपनी-अपनी क्षमता के अनुरूप दान दिया. देश भर से मंदिर निर्माण के लिए दान की रकम विभिन्न माध्यमों से पहुँचने लगी, जो अभी भी जारी है. दान में मिली रकम की वजह से अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण समय से पूरा हुआ. अब जब देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन को पहुंच रहे हैं तो दान का सिलसिला भी तेज हो चला है. इसी रकम से चोरी की सूचना के बाद बवाल मचा हुआ है.
श्रीराम जन्म भूमि क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण से जुड़े सभी विषयों पर निर्णय ले सकता है. फोटो: PTI
ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण नियम?श्रीराम जन्म भूमि क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण से जुड़े सभी विषयों पर निर्णय ले सकता है. बोर्ड ऑफ ट्रस्टी कुछ सदस्यों को अपनी ओर से नामित करने का अधिकार रखता है. नियम है कि नामित सदस्य हिंदू होने चाहिए. वेबसाइट सभी सदस्यों के नाम, पद, फ़ोटो के साथ पब्लिश किये गए हैं. ट्रस्ट के प्रेसीडेंट श्री मणिराम दास जी की छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज हैं. रामलला के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में पेश श्री के. परासरण संस्थापक ट्रस्टी हैं.
क्या है राम मंदिर ट्रस्ट का महत्व?राम मंदिर ट्रस्ट का महत्व कई कारणों से है. इसी ने ट्रस्ट भव्य राम मंदिर के निर्माण की दिशा में काम किया. आज मंदिर जिस स्वरूप में आम जनता के सामने हैं, उसमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका है. ट्रस्ट में दलित सदस्य भी शामिल हैं, जिससे सामाजिक संतुलन बना है. ट्रस्ट में देश भर से कई संतों, एक डॉक्टर, एक वकील को स्थान दिया गया है. यह ट्रस्ट अयोध्या में धार्मिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में भी अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है. यद्यपि, यह पहल अभी शुरुआती चरण में है.
ट्रस्ट में देश भर से कई संतों, एक डॉक्टर, एक वकील को स्थान दिया गया है.
राजनीतिक बयानबाजी से मामले ने पकड़ा तूलजैसे ही चोरी की घटना सामने आई, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से इसे करोड़ों रुपये की चोरी का आरोप लगाया. उनके साथ ही आम आदमी पार्टी, कांग्रेस एवं अन्य दलों ने भी इस मामले में अपनी-अपनी आहुतियाँ डालीं. ट्रस्ट ने इस मामले को शुरू में अपने स्तर पर देखा. शोर हुआ तो राज्य सरकार से एसआईटी गठन का अनुरोध किया. नियमानुसार अगर चोरी हुई है तो एफआईआर दर्ज होना चाहिए. अब यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मंदिर से जुड़े कई कर्मचारी ट्रस्ट की नजर में हैं. अलग-अलग कर्मचारियों से कुछ रकम बरामद होने की सूचना भी आम है. कहा जा सकता है कि इस मामले में ट्रस्ट ने पारदर्शिता नहीं बरती. अन्यथा, इतना शोर नहीं होता.
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