टीएमसी में संकट गहराया, पूर्व कोषाध्यक्ष ने पार्टी के बैंक खाते पर रोक लगाने की मांग की
Indias News Hindi June 18, 2026 08:43 PM

कोलकाता, 18 जून . पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का आंतरिक संकट अब पार्टी की वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच गया है. पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर टीएमसी के बैंक खाते से किसी भी तरह के लेनदेन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.

Thursday को सामने आए इस पत्र में अरूप बिस्वास ने बैंक से अनुरोध किया कि पार्टी के नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर जारी विवाद के समाधान तक खाते से निकासी और अन्य डेबिट लेनदेन पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखी जाए.

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव में हार के बाद 5 जून को टीएमसी ने संगठनात्मक फेरबदल करते हुए पूर्व सांसद सुभाषिष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था. हालांकि, बैंक को भेजे गए अपने पत्र में अरूप बिस्वास ने दावा किया है कि वह अब भी पार्टी के वैध कोषाध्यक्ष हैं.

चुनाव आयोग को सौंपे गए ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के इस बैंक खाते में लगभग 675 करोड़ रुपये जमा हैं. अरूप बिस्वास का पत्र 12 जून को लिखा गया था, जिसे बैंक ने 16 जून को प्राप्त किया.

अपने पत्र में बिस्वास ने कहा कि पार्टी के भीतर विभिन्न गुट खुद को टीएमसी का वैध प्रतिनिधि और पदाधिकारी बता रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि बैंक खाते का संचालन करने का अधिकार किसके पास है. उन्होंने बैंक से अपील की कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को खाते से निकासी या अन्य लेनदेन की अनुमति न दी जाए और उनके द्वारा पहले से हस्ताक्षरित चेकों के संभावित दुरुपयोग को भी रोका जाए.

पत्र में उन्होंने लिखा, “मैं, अरूप बिस्वास, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के कोषाध्यक्ष के रूप में आपको सूचित कर रहा हूं कि पार्टी के अधिकार और नियंत्रण को लेकर गंभीर विवाद चल रहा है. ऐसे में संगठन की निधि की सुरक्षा के लिए बैंक खाते में किसी भी प्रकार के डेबिट लेनदेन या संचालन संबंधी बदलाव की अनुमति न दी जाए, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से स्पष्ट निर्देश न मिल जाएं.”

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सुभाषिष चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें इस पत्र की जानकारी नहीं है. उन्होंने दावा किया कि वह राज्य संगठन के कोषाध्यक्ष हैं, जबकि अरूप बिस्वास अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्य और अखिल भारतीय संगठन के अलग-अलग बैंक खाते हैं, तो उन्होंने कहा कि पार्टी का केवल एक ही बैंक खाता है.

विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी में आंतरिक कलह लगातार बढ़ती जा रही है. पार्टी फिलहाल तीन गुटों में बंटी नजर आ रही है- एक गुट बागी विधायकों का, दूसरा बागी सांसदों का और तीसरा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट.

सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार समर्थक सांसदों का गुट, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय किया है, टीएमसी के चुनाव चिह्न पर दावा करने की कोशिश जारी रखने की बात कह चुका है. वहीं, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक विधायक खुद को “असली तृणमूल” बता रहे हैं.

अरूप बिस्वास का यह कदम इसलिए भी Political रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा बगावत के दौरान उन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है. हालांकि 5 जून के संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था, लेकिन पार्टी महासचिव के रूप में बरकरार रखा गया था.

इस बीच, अपने भाई स्वरूप बिस्वास की गिरफ्तारी और मेसी प्रकरण में Police समन के बाद सार्वजनिक जीवन से दूर रहे अरूप बिस्वास Thursday को आखिरकार तीन बार समन टालने के बाद बिधाननगर दक्षिण Police थाने में अधिकारियों के सामने पेश हुए.

डीएससी

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.