ईरान और अमेरिका के बीच डील कराने में अब तक कतर के अमीर तमीम बिन अल थानी और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की बड़ी भूमिका बताई जा रही थी, लेकिन ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक डील को अंजाम तक पहुंचाने में संयुक्त अरब अमीरात के कारोबारी शेख तहून बिन जायद अल नाहयान का सबसे बड़ा रोल है. नाहयान के कारण ही यूएई ने युद्ध में शांति की बात की, जिसे मजबूरन अमेरिकाको भी स्वीकार करना पड़ा. नाहयान की वजह से मिडिल ईस्ट में इजराइल अलग-थलग पड़ गया.
रिपोर्ट के मुताबिक नाहयान की पहचान यूएई राजपरिवार में एक बिजनेस प्रमुख की है, जिनके पास 1 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति है.
नाहयान ने डील को अंजाम तक कैसे पहुंचाया?1. ईरान और अमेरिका के बीच डील पर अप्रैल में ही बातचीत शुरू हो गई थी. उस वक्त पाकिस्तान और कतर इसमें मध्यस्थ कर रहा था, लेकिन यूएई ने डील से खुद को पीछे खिंच लिया. यूएई ने उस वक्त ईरान के साथ युद्ध करने का प्रस्ताव दिया, जिसके कारण डील की शर्तों पर बात नहीं बन पाई. अमेरिकी वार्ता दल के प्रमुख जेडी वेंस को इस्लामाबाद से वापस लौटना पड़ा.
2. ब्लूमबर्ग के मुताबिक नाहयान को जब कूटनीतिक बातचीत की जिम्मेदारी दी गई, तब उन्होंने सबसे पहले ईरान के सर्वोच्च नेताओं से संपर्क साधा. उन्होंने ईरान से रिश्ते ठीक किए. रॉयटर्स के मुताबिक ईरान को यूएई ने 3 अरब डॉलर की जब्त राशि दी. बदले में ईरान ने यूएई पर हमला न करने की बात कही.
3. ईरान और यूएई के रिश्ते ठीक होने के बाद खाड़ी देशों ने एक साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर डील के लिए दबाव डाला, जिसके कारण ट्रंप को डील का फैसला लेना पड़ा. एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि दुनिया के पेट्रोलियम भंडार सूख रहे थे. मेरे पास कोई रास्ता नहीं था.
4. यूएई अब्राहम समझौते में इजराइल के साथ शामिल है, लेकिन ईरान से डील के लिए यूएई ने इजराइल का साथ छोड़ दिया. नाहयान की कूटनीतिक की वजह से इजराइल पूरे इलाके में अकेला पड़ गया है. कहा जा रहा है कि यूएई उस रिपोर्ट से नाराज है, जिसे इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय से लीक की गई थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान जंग के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू यूएई गए थे.
ईरान और अमेरिका के बीच किन मुद्दों पर होगी बात?अस्थाई डील के बाद अब ईरान और अमेरिका पूर्ण रूप से समझौते को फाइनल करने के लिए बैठक करेगा. अमेरिका की कोशिश ईरान के संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश में शिफ्ट कराने की है. इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान में यूरेनियम संवर्धन के लिए जितने भी सेंट्रीफ्यूज है, उसे नष्ट किया जाए.
वहीं ईरान होर्मुज पर आधिकारिक तौर पर टोल लगाना चाहता है. ईरान चाहता है कि अमेरिका इस प्रस्ताव को आधाकारिक तौर पर स्वीकार करे.