गोवा भयंकर पेयजल संकट से जूझ रहा है. यह संकट अचानक नहीं आया है और न ही इसका एक कारण है. लेकिन अरब सागर किनारे बसे पर्यटक केंद्र वाले इस राज्य का नाम सुनते ही आंखों के सामने लहराता समंदर और चारों तरफ हरियाली आ जाती है. प्रकृति ने इस राज्य को भर पूर वर्षा और नदियों का उपहार दिया है. फिर भी हालत खराब है. आइए जानते हैं कि आखिर समुद्र किनारे बसे इस राज्य में यह संकट कैसे पैदा हुआ और इसका समाधान क्या है?
गोवा में पेयजल संकट की जड़ें काफी पुरानी हैं. साल 1980-90 के दशक में इसकी आहट मिलनी शुरू हो गई थी. इस दौरान गोवा में पर्यटन उद्योग ने तेजी से पैर पसारना शुरू किया. बड़े होटलों और रिसॉर्ट्स के निर्माण के कारण तटीय इलाकों के कुओं से अत्यधिक पानी निकाला जाने लगा. इसी समय से भूजल स्तर में गिरावट और कुछ इलाकों में पानी के खारे होने की शुरुआत हुई. साल 2005 से 2010 के बीच संकट महसूस किया जाने लगा. यह वह दौर था जब गोवा में खनन और शहरीकरण अपनी चरम सीमा पर थे. उत्तरी गोवा के बिचोलिम और सातारि जैसे इलाकों में खनन के कारण प्राकृतिक झरने सूखने लगे. पंजिम और मडगांव जैसे शहरों में बड़ी बिल्डिंगों के आने से पानी की मांग अचानक बढ़ गई, जिसे पुराने ट्रीटमेंट प्लांट पूरा नहीं कर पाए.
महादायी नदी विवाद क्यों महत्वपूर्ण?गोवा की जीवन रेखा कही जाने वाली महादायी (मांडवी) नदी के पानी को मोड़ने के लिए कर्नाटक सरकार ने जब 2002 में योजनाएं बनाईं, तब गोवा को भविष्य के बड़े संकट का अहसास हुआ. यह विवाद तब से अब तक चल रहा है और इसने गोवा की जल सुरक्षा पर तलवार लटका दी है. पिछले 5-6 वर्षों में स्थिति बहुत खराब हुई है. गर्मियों के दौरान यानी मार्च से मई तक दक्षिण गोवा और उत्तरी गोवा के कई गांवों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है. आज स्थिति यह है कि भारी बारिश वाले राज्य में भी लोगों को हफ्ते में कुछ ही घंटे सप्लाई का पानी मिल पाता है.
समंदर से किनारे बसे गोवा में पिछले 5-6 वर्षों में जलसंकट बढ़ा है. फोटो: Unsplash
क्या है गोवा में जल संकट के मुख्य कारण?गोवा में पानी की कमी के पीछे कोई एक वजह नहीं है. इसकी कई वजहें हैं. कुछ भौगोलिक और कुछ स्थानीय आबादी एवं पर्यटकों की वजह से है.
अनियंत्रित पर्यटन भी गोवा में जलसंकट की एक वजह है. फोटो: Unsplash
नदियों और बांधों के सहारे है वर्तमान जलापूर्तिगोवा में वर्तमान में पीने के पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से नदियों और बांधों पर टिकी है. गोवा की दो सबसे बड़ी नदियां, मांडवी (महादायी) और जुआरी, राज्य की प्यास बुझाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं. मांडवी नदी उत्तरी गोवा के एक बड़े हिस्से को पानी देती है, जबकि जुआरी नदी दक्षिण गोवा के लिए महत्वपूर्ण है. राज्य के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट इन्हीं नदियों से पानी लेते हैं. नदियों के पानी को सहेजने और उसे साल भर सप्लाई करने के लिए कुछ प्रमुख बांध बनाए गए हैं. इनमें सेलाउलिम बांध, अंजुनम बांध, ओपा जल परियोजना एवं टिलारी बांध महत्वपूर्ण हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी कुओं और बोरवेल पर निर्भर हैं.
गोवा को कितना पानी चाहिए और कितना उपलब्ध है?गोवा की आबादी और वर्तमान विकास की रफ्तार को देखते हुए पानी की मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़ता जा रहा है. वर्तमान में गोवा को प्रतिदिन लगभग 600 से 650 मिलियन लीटर पीने के पानी की आवश्यकता है. पर्यटन के चरम पर यह मांग और बढ़ जाती है. राज्य के पास मौजूद सात मुख्य ट्रीटमेंट प्लांट्स के माध्यम से लगभग 550 मिलियन लीटर पानी की ही आपूर्ति हो पाती है. अनुमान है कि साल 2030 तक गोवा को हर दिन 800 मिलियन लीटर से अधिक पानी की जरूरत होगी. यानी लगभग 100-150 मिलियन लीटर का अंतर अभी भी बना हुआ है. आगे यह संकट और बढ़ेगा.
गोवा जल संकट.
संकट से निपटने को राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए?गोवा सरकार इस संकट को दूर करने के लिए हर घर जल मिशन और अन्य योजनाओं पर काम कर रही है. सरकार गनलक्ष्मी और पेरनेम जैसे इलाकों में नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा रही है ताकि आपूर्ति बढ़ाई जा सके. करीब 20-30 फीसदी पानी पुरानी पाइप-लाइनों के लीकेज के कारण बर्बाद हो रहा है. सरकार इन पाइपों को बदल रही है. पानी की बर्बादी रोकने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे खपत पर नजर रखी जा सके. सरकार महादायी नदी विवाद को सुलझाने के लिए कानूनी और राजनीतिक स्तर पर प्रयासरत है ताकि राज्य को उसके हक का पानी मिले. नए निर्माणों में बारिश के पानी को सहेजने के सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है.
संकट से निकलने का स्थायी निदानकेवल सरकारी प्रयासों से इस संकट का अंत नहीं हो सकता. इसके लिए चौतरफा रणनीति की जरूरत बताई जा रही है.
गोवा के लिए जल संकट एक चेतावनी है. अगर आज हमने अपने प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए मछली और फेनी का यह प्रदेश केवल इतिहास बनकर रह जाएगा. सरकार, प्रशासन और जनता को मिलकर काम करना होगा ताकि गोवा की हरियाली और खुशहाली बरकरार रहे. समुद्र का किनारा होना गौरव की बात है, लेकिन मीठा पानी सहेजना हमारी जिम्मेदारी है.
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