Rajasthan University Negligence: राजस्थान विश्वविद्यालय में एक बार फिर से परीक्षा में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां जूलॉजी परीक्षा में प्रश्न पत्र की जगह उत्तर लिखे पेपर ही छात्रों को थमा दिए गए. जब छात्रों ने इस बात की शिकायत तो टीचर्स अपनी गलती मानने की बजाय छात्रों से कहने लगे कि ये बात बाहर नहीं जानी चाहिए. अब यह मामला प्रदेश सहित देशभर में चर्चा का विषय बना गया है. हर कोई विश्वविद्यालय की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
दरअसल, यह मामला MSc के फोर्थ सेमेस्टर की जूलोजी की परीक्षा से जुड़ा है, जहां परीक्षा में छात्रों को क्वेश्चन पेपर की जगह आंसर शीट ही थमा दी गई. एक बार तो परीक्षार्थी कंफ्यूज हो गए, लेकिन जब उन्हें पता लगा कि यह आधिकारिक आंसर की है तो उन्होंने इसकी शिकायत की. हालांकि, टीचर्स ने सभी 60 परीक्षार्थियों को चुप रहने के बदले बोनस अंक दिलवाने का लालच दिया. हैरानी की बात यह है कि ऐसा पहली बार नहीं हुई है. पिछली बार भी ऐसा ही मामला सामने आया था.
छात्र नेता ने की कार्रवाई की मांगपुरानी गलती से कोई सबक नहीं लेकर इस बार दोबारा गलती दोहराई गई. इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्र नेता लक्ष्यराज लुहारिया का कहना है कि इस तरह की दूसरी बार लापरवाही होना विश्वविद्यालय की परीक्षा की साख पर सीधा सवाल खड़ा करती है. उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में ऐसी चूक हो सकती है, तो विद्यार्थियों का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

बता दें कि इससे पहले एमए समाजशास्त्र द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को प्रश्न पत्र की जगह सीधे उत्तर कुंजी ही थमा दी गई थी. परीक्षा केंद्र पर जैसे ही छात्रों ने प्रश्नों के साथ उनके उत्तर देखे, वे हैरान रह गए. कुछ देर के लिए माहौल ऐसा बन गया मानो परीक्षा शुरू होने से पहले ही परिणाम घोषित कर दिया गया हो. प्रश्न पत्र की जगह आंसर शीट बांटने का पहला मामला 16 अप्रैल मंगलवार का है, जब आयोजित परीक्षा में करीब 300 विद्यार्थी पंजीकृत थे.
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चर्चा का केंद्र बनी परीक्षापरीक्षा कक्ष में बैठे छात्रों ने जब उत्तरों से भरी शीट देखी तो पहले उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जल्द ही स्पष्ट हो गया कि यह कोई मॉडल पेपर नहीं, बल्कि आधिकारिक आंसर की है. इसके बाद परीक्षा केंद्र पर विरोध शुरू हो गया और छात्रों ने परीक्षा देने से इनकार कर दिया. हालांकि, शिक्षकों ने तत्काल उत्तर कुंजी वाली शीट वापस ले ली, लेकिन तब तक मामला छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन चुका था.
27 जून को होगी दोबारा परीक्षानाराज विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया था. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पेपर सेटर ने प्रश्न पत्र और उसकी उत्तर कुंजी अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में भेजी जाती है. लेकिन प्रिंटिंग प्रक्रिया के दौरान उत्तर कुंजी वाला लिफाफा गलती से प्रश्नपत्र समझ लिया गया और उसी की छपाई कर सीलबंद पैकेट परीक्षा केंद्रों पर भेज दिए गए. चूंकि परीक्षा शुरू होने तक सीलबंद लिफाफे नहीं खोले जाते, इसलिए यह बड़ी चूक समय रहते पकड़ में नहीं आ सकी. मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया था. अब यह परीक्षा 27 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी.