Uttarakhand News Hindi: देवभूमि उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक बेहद रोमांचक और बड़ी खबर सामने आ रही है. उत्तराखंड को अब सिर्फ पहाड़ों और वादियों के लिए ही नहीं, बल्कि पानी से उड़ान भरने वाले विमानों यानी ‘सी-प्लेन’ (Sea-Plane) के देश के सबसे अनोखे सर्किट के लिए भी जाना जाएगा. राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और आवागमन को सुगम बनाने के लिए सी-प्लेन सेवाओं के विस्तार की दिशा में बेहद तेजी से कदम आगे बढ़ा रही है.
उत्तराखंड सरकार लंबे समय से इस महत्वाकांक्षी सी-प्लेन परियोजना पर काम कर रही थी. शुरुआत में इस योजना को सिर्फ टिहरी झील से शुरू करने का विचार था. लेकिन, एक लंबे इंतजार के बाद जब हाल ही में ऋषिकेश बैराज में पहली बार सी-प्लेन की सफल ट्रायल लैंडिंग की गई और उसके कुछ ही दिनों बाद टिहरी झील में भी सी-प्लेन को सफलतापूर्वक उतारा गया, तो इस योजना को पंख लग गए.
इन दोनों बड़ी सफलताओं के बाद अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने राज्य के तीन और प्रमुख जलाशयों को सी-प्लेन संचालन के संभावित स्थलों के रूप में चिह्नित किया है:
इन तीनों जलाशयों में भी बहुत जल्द सी-प्लेन की ट्रायल लैंडिंग की जाएगी, जिसके बाद इन्हें मुख्य सर्किट से जोड़ दिया जाएगा.
दूरस्थ पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान, बढ़ेगा एडवेंचर टूरिज्म
उत्तराखंड सरकार जिस ‘सी-प्लेन सर्किट योजना’ को अमलीजामा पहनाने में जुटी है, उसका मुख्य उद्देश्य राज्य के दूरस्थ और दुर्गम पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच को बेहद आसान और कम समय वाला बनाना है. इस सेवा के शुरू होने से न केवल देश-विदेश के सैलानियों को एक बेहद रोमांचक हवाई यात्रा का अनुभव मिलेगा, बल्कि राज्य के साहसिक (Adventure) और प्राकृतिक पर्यटन को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी.
रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट
माना जा रहा है कि एक बार यह पूरा सी-प्लेन सर्किट विकसित और चालू हो जाने के बाद, संबंधित क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के ढेरों नए अवसर पैदा होंगे. पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, होमस्टे, गाइड्स और स्थानीय परिवहन व्यवसायों को सीधे तौर पर गति मिलेगी, जिससे आसपास के ग्रामीण और कस्बाती क्षेत्रों के आर्थिक विकास को बड़ा बल मिलेगा.
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संजय टोलिया (अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यूकाडा) ने बताया- अभी ऋषिकेश और टिहरी में सफल ट्रायल किए जा चुके हैं और हमारी पहली प्राथमिकता इन दोनों स्थानों पर नियमित रूप से सी-प्लेन उड़ाने की योजना को शुरू करना है. यहां व्यावसायिक संचालन पूरी तरह सफल होने के बाद, हम चिन्हित किए गए अन्य जलाशयों को शामिल करते हुए पूरे सर्किट को विकसित करने की दिशा में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे.
सरकार इस पूरी परियोजना को बेहद सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए चरणबद्ध तरीके की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उत्तराखंड पर्यटन को एक नया आयाम दिया जा सके.