Birth of Kaveri River: सनातन धर्म में गंगा समेत कई नदियों को मां का दर्जा दिया गया है. शास्त्रों में कावेरी नदी भी बहुत पूजनीय मानी गई है. इस नदी का विशेष महत्व माना जाता है. इस नदी के जन्म की कथा भगवान गणेश और ऋषि अगस्त्य से जुड़ी बताई जाती है. आखिर कैसे कावेरी नदी उत्पन्न हुई? आइए विस्तार से जानते हैंं इस पावन नदी के जन्म की पौरणिक कथा.
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के समय सभी देवता और ऋषि कैलाश पर्वत पर पहुंचे. इससे उत्तर दिशा का भार बढ़ गया और संतुलन गड़बड़ा गया. तब भगवान शिव ने अगस्त्य ऋषि को दक्षिण दिशा की ओर भेजा, ताकि भूमि संतुलित रहे. यही नहीं भगवान ने उनके कमंडल में कावेरी को स्थापित कर दिया. उसी समय असुर सुरपद्म का आतंक इतना बढ़ा कि वर्षा रुक गई.
गणेश जी ने कौए का रूप धारण कियावर्षा रुकने की वजह से देवताओं के राजा इंद्र को चिंता हो गई. तब देवराज इंद्र को नारद जी से पता चला कि कावेरी अगस्त्य के कमंडल में हैं. ऐसे में देवताओं को चिंता हुई कि अगर ये दिव्य जल ऋषि के कमंडल में ही रहा तो संसार के लोग इसका लाभ नहीं ले पाएंगे. इसके बाद सभी देवता भगवान गणेश की शरण में पहुचें और उनसे सहायता मांगी. फिर भगवान गणेश ने कौए का रूप धारण किया.
कावेरी नदी का उद्गम हुआभगवान गणेश कौए के रूप में ऋषि अगस्त्य के पास पहुंचकर उनके कमंडल के ऊपर जाकर बैठ गए. इसके बाद ऋषि ने कमंडल पर कौए के रूप में बैठे भगवान गणेश को उड़ाने की कोशिश की. इस पर कमंडल गिर गया और उसमें भरा हुआ जल जमीन पर बहने लगा, जिससे कावेरी नदी का उद्गम हुआ. पहले तो ऋषि अगस्त्य इस घटना के बारे में जान नहीं सके, लेकिन जब उन्हें ये बात चली तो उन्होंने जाना कि वो कोई साधारण कौआ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान गणेश जी थे.
कावेरी है दक्षिण की गंगाकावेरी नदी का वर्णन स्कंद पुराण में कावेरी माहात्म्य नाम के खंड में विस्तार से किया गया है. इसके अलावा श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध में भी कावेरी नदी की उत्पति का उल्लेख मिलता है. जितना उत्तर भारत में गंगा नदी महत्वपूर्ण मानी जाती है, उतना ही दक्षिण में कावेरी नदी का महत्व माना जाता है. यही कारण है कि लोग कावेरी नदी को दक्षिण की गंगा कहते हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.