नीदरलैंड में पहली बार 12 साल से कम उम्र के बच्चे को इच्छामृत्यु, डॉक्टर की होगी जांच
TV9 Bharatvarsh June 27, 2026 12:44 PM

नीदरलैंड में पहली बार 12 साल से कम उम्र के एक बच्चे को कानूनी इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) दी गई है. यह पहला मामला है, जो 2024 में कानून बदलने के बाद सामने आया है. नए नियमों के तहत 1 से 12 साल की उम्र के उन बच्चों को इच्छामृत्यु दी जा सकती है, जो लाइलाज बीमारी से पीड़ित हों, असहनीय दर्द झेल रहे हों और जिनके ठीक होने की कोई उम्मीद न हो.

नीदरलैंड की स्वास्थ्य मंत्री सोफी हरमंस ने बताया कि यह बच्चा पिछले साल इच्छामृत्यु के जरिए दुनिया से विदा हुआ. हालांकि, उन्होंने बच्चे की उम्र, पहचान या बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. उन्होंने यह जानकारी संसद में सरकार की सालाना रिपोर्ट पेश करते समय दी. स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि अब इस मामले की जांच सरकारी वकील करेंगे. वे देखेंगे कि इच्छामृत्यु करने वाले डॉक्टर ने कानून में तय सभी नियमों का सही तरीके से पालन किया या नहीं.

2024 में बदला गया था कानून

नीदरलैंड सरकार ने 2024 में कानून में बदलाव किया था. इसके बाद 1 से 12 साल तक के बच्चों को भी कुछ खास परिस्थितियों में इच्छामृत्यु की अनुमति मिल गई. सरकार ने साफ किया है कि इच्छामृत्यु सिर्फ गंभीर मेडिकल कंडिशन पर ही दी जा सकती है. सिर्फ यह महसूस करना कि जीवन पूरा हो चुका है या अब जीने का मन नहीं है, इच्छामृत्यु की अनुमति पाने का आधार नहीं है.

डॉक्टरों को कई नियम मानने होते हैं

इच्छामृत्यु देने से पहले डॉक्टरों को कई कानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं. उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि मरीज का दर्द असहनीय है, उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है और उसे उसकी बीमारी की पूरी जानकारी दी गई है. साथ ही यह भी देखना होता है कि इलाज का कोई दूसरा उचित विकल्प मौजूद नहीं है.

डॉक्टर को एक स्वतंत्र डॉक्टर की राय भी लेनी होती है और पूरी प्रक्रिया बहुत सावधानी से पूरी करनी होती है. 12 साल से कम उम्र के मरीज के उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति लेना जरूरी है. जब यह कानून बनाया गया था, तब सरकार ने अनुमान लगाया था कि हर साल लगभग 5 से 10 बच्चों पर यह नियम लागू हो सकता है.

पहले क्या नियम थे?

नीदरलैंड में पहले से एक साल से कम उम्र के शिशुओं और 12 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति थी. लेकिन 1 से 12 साल के बच्चों को यह अधिकार नहीं था. ऐसे बच्चों को सिर्फ दर्द कम करने वाला इलाज दिया जाता था या फिर प्राकृतिक मृत्यु का इंतजार किया जाता था.

12 से 15 साल के बच्चों के लिए इच्छामृत्यु कराने में माता-पिता या अभिभावक की मंजूरी जरूरी होती है. वहीं 16 और 17 साल के किशोर खुद फैसला ले सकते हैं, हालांकि उनके माता-पिता को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है. अगर कोई डॉक्टर कानून के बाहर जाकर इच्छामृत्यु देता है, तो उसे 12 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.

यूथेनेशिया को मान्यता देने वाला पहला देश

नीदरलैंड 2002 में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बना था. यहां हर मामले की मेडिकल जांच समिति समीक्षा करती है. वहीं, बेल्जियम ने 2014 में सभी उम्र के बच्चों के लिए भी इच्छामृत्यु को कानूनी मंजूरी दे दी थी.

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