Mahabharata Curses: आज भी खत्म नहीं हुए महाभारत काल के ये 2 श्राप, कलयुग में भी है असर!
TV9 Bharatvarsh June 29, 2026 11:43 PM

Ancient Curses, Modern Impact: महाभारत का युद्ध सिर्फ कौरवों और पांडवों के बीच सत्ता को लेकर हुई लड़ाई भर नहीं थी, बल्कि ये धर्म और अधर्म के बीच हुआ टकराव था. जिसमें जीत अंत में धर्म की हुई थी. महाभारत जीवन के कई पहलुओं जैसे कर्म, सच, रिश्ते और हमारे फैसलों के परिणाम, के बारे में एक सीख प्रदान करता है. महाभारत में कई ऐसे क्षण हैं, जहां झूठ बोलने या सच छिपाने पर श्राप दिए गए.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल के समय दिए गए दो श्राप का प्रभाव तो आज के समय यानी कलयुग में भी नजर आता है. लोग इन्हें कर्मों के फल और जीवन के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा करते हैं.

युधिष्ठिर ने दिया था नारी जाति को श्राप

महाभारत युद्ध के समय कर्ण वध के बाद पांडवों की माता कुंती ने युधिष्ठिर समेत सभी पांडवों को एक बड़ा रहस्य बताया था. माता कुंती ने विलाप करते हुए कहा था कि कर्ण उनका ही पुत्र था. ये बात जानकर पांडव बहुत आहत हुए थे और युधिष्ठिर ने क्रोध में आकर समस्त नारी जाति को श्राप दे दिया था. उन्हने पूरी नारी जाति को श्राप देते हुए कहा था कि कोई भी स्त्री किसी भी रहस्य को छिपाकर नहीं रख पाएगी. माना जाता है कि युधिष्ठिर के दिए इस श्राप का प्रभाव आज भी है.

श्रीकृष्ण ने दिया था अश्वत्थामा को श्राप

महाभारत युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने धोखे से पांडवों के सभी पुत्रों को सोते समय मार दिया था. इसके बाद पांडव अश्वत्थामा को खोजते हुए महर्षि वेदव्यास के आश्रम पहुंचे तो उसने ब्रह्मास्त्र चला दिया. इसके जबाव में अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र चला दिया, लेकिन वेदव्यास जी ने दोनों को रोक दिया. अर्जुन ने अपना अस्त्र वापस ले लिया, लेकिन अश्वत्थामा को ऐसा नहीं कर सका. उसने ब्रह्मास्त्र उत्तरा के गर्भ में मोड़ दिया. इस पर क्रोधित होकर श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दे दिया.

भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप देते हुए कहा कि वो हजारों वर्षों तक पृथ्वी पर भटकता रहेगा. मान्यता है कि कलयुग में भी श्रीकृष्ण के इस श्राप का प्रभाव है और अश्वत्थामा पृथ्वी पर भटक रहा है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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