राजस्थान को अक्सर पानी की कमी वाले राज्य के रूप में देखा जाता है. यहां कई जिलों में आज भी पीने के पानी से लेकर सिंचाई तक के लिए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में यमुना नदी के पानी को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच हुआ नया समझौता राज्य के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. इस समझौते के तहत अब राजस्थान को यमुना से 1900 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलेगा. इसके साथ ही राज्य का कुल हिस्सा बढ़कर 3100 क्यूसेक हो जाएगा. इस अलॉटमेंट के बाद हरियाणा और पंजाब के बाद राजस्थान, यमुना के पानी का तीसरा सबसे बड़ा हिस्सेदार बन जाएगा.
यह समझौता सिर्फ पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सालों की योजना और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी जुड़ा है. राजस्थान तक यमुना का पानी पहुंचाने के लिए करीब 295 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे रास्ते में पानी की बर्बादी कम होगी और पानी सीधे जरूरत वाले इलाकों तक पहुंचेगा. खास बात यह है कि यह पानी मुख्य रूप से राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से के जिलों को फायदा पहुंचाएगा, जहां पेयजल और सिंचाई की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. इस परियोजना की अनुमानित लागत 34,102 करोड़ रुपये है.
दिल्ली में हुआ समझौताकेंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में 29 जून को दिल्ली को ये समझौता हुआ है. इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल भी मौजूद थे. हालांकि, इस समझौते की सफलता केवल अतिरिक्त पानी मिलने से तय नहीं होगी. सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि तय मात्रा में पानी समय पर राजस्थान तक पहुंचे और उसका उपयोग प्रभावी ढंग से किया जाए. समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच पश्चिमी यमुना नहर से करीब 580 एमसीएम पानी राजस्थान भेजा जाएगा.
अलग-अलग राज्य में बंटा थाअगर, पाइपलाइन परियोजना समय पर पूरी होती है और वितरण प्रणाली बेहतर रहती है, तो यह समझौता न केवल लाखों लोगों को राहत देगा, बल्कि कृषि, पेयजल आपूर्ति और भूजल संरक्षण के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव ला सकता है. 1994 में हुए अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते के तहत यमुना नदी का पानी अलग-अलग राज्यों में बांटा गया था. इसी समझौते में राजस्थान के हिस्से का पानी भी तय किया गया था. अब हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए नए समझौते (MOU) का मकसद राजस्थान को उसका तय हिस्सा दिलाना है.
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान को मिलने वाला यह पानी सिर्फ जुलाई से अक्टूबर के बीच ही उपलब्ध हो सकेगा. इसकी वजह यह है कि यमुना में पर्याप्त अतिरिक्त पानी सालभर नहीं रहता. नदी में क्षमता से ज्यादा पानी केवल 25 से 30 दिन ही आता है, इसलिए पूरे चार महीनों तक लगातार तय मात्रा में पानी मिलना आसान नहीं होगा.