महाराष्ट्र के सभी स्कूलों में पहली से 10वीं तक मराठी पढ़ाना अनिवार्य, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना
TV9 Bharatvarsh June 30, 2026 12:43 PM

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए पहली से दसवीं कक्षा तक मराठी भाषा पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है. यह नियम सभी स्कूलों पर लागू होगा, चाहे उनकी पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी, हिंदी या कोई अन्य भाषा ही क्यों न हो. स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने विधानसभा में बताया कि यह फैसला ‘महाराष्ट्र स्कूलों में मराठी भाषा का अनिवार्य शिक्षण और अधिगम अधिनियम, 2020’ के तहत लागू किया जा रहा है.

नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

सरकार ने साफ किया है कि जो स्कूल इस नियम का पालन नहीं करेंगे, उन्हें पहले चेतावनी दी जाएगी. इसके बाद भी अगर मराठी की पढ़ाई शुरू नहीं होती है तो संबंधित स्कूल पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. लगातार नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है. सरकार ने 17 अप्रैल 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इस नीति को अब सख्ती से लागू किया जाएगा.

मराठी विषय की होगी परीक्षा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि मराठी केवल औपचारिक विषय नहीं रहेगा. पहली से दसवीं तक सभी कक्षाओं में इसकी नियमित परीक्षा आयोजित होगी. यानी छात्रों के लिए मराठी अन्य मुख्य विषयों की तरह ही अनिवार्य होगी.

विधानसभा में उठे कई सवाल

विपक्षी नेताओं ने सरकार से पूछा कि 2020 में कानून बनने के बाद इसे सख्ती से लागू करने में इतनी देर क्यों हुई. साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई कि अब तक कितने स्कूलों पर कार्रवाई हुई है. कुछ विधायकों ने जुर्माने की राशि बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की.

राज्य गीत और इतिहास पर भी जोर

सरकार ने स्कूलों से राज्य गीत ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ को सम्मानपूर्वक गाने का भी आग्रह किया है. इसके अलावा इतिहास की किताबों में छत्रपति शिवाजी महाराज, सावित्रीबाई फुले और महात्मा फुले से जुड़े विषयों को बेहतर ढंग से शामिल करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.

मराठा छात्रों को मिलेगी अतिरिक्त सहायता

सरकार ने मराठा समुदाय के छात्रों के लिए शिक्षा संबंधी सुविधाओं का दायरा भी बढ़ाया है. अब उन्हें स्कॉलरशिप, प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस सहायता और राज्य के बाहर पढ़ाई करने पर आर्थिक मदद जैसी कई सुविधाएं मिल सकेंगी. सरकार का कहना है कि इन कदमों से छात्रों को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलेंगे.

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