PFC-REC मर्जर में कहां लगाएं पैसा, मुनाफे के लिए कौन सा शेयर खरीदें?
TV9 Bharatvarsh June 30, 2026 08:43 PM

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और आरईसी (REC) के विलय को दोनों कंपनियों के बोर्ड ने अपनी मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंसिंग कंपनी अस्तित्व में आएगी, जिसका कुल लोन बुक 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा. इस महाविलय में सबसे अहम फैसला शेयर स्वैप रेशियो का हुआ है, जिसके तहत REC के हर 100 शेयरों के बदले निवेशकों को PFC के 88 शेयर मिलेंगे. अब शेयर बाजार में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बड़े बदलाव के बीच मुनाफा कमाने के लिए पीएफसी या आरईसी में से किस शेयर पर दांव लगाया जाए.

पावर सेक्टर में विशालकाय कंपनी का उदय

रविवार को पीएफसी तथा आरईसी के बोर्ड सदस्यों ने बहुप्रतीक्षित मर्जर योजना पर अपनी मुहर लगा दी है. यह कोई सामान्य विलय नहीं है, बल्कि इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र को कर्ज देने वाली एक बड़ी संस्था का जन्म होगा. विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी की बैलेंस शीट देश के सबसे बड़े गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) के बराबर होगी. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों कंपनियों के कामकाज में होने वाला दोहराव खत्म होगा. एक ही प्रोजेक्ट में दोनों कंपनियों द्वारा अलग-अलग कर्ज देने की समस्या समाप्त होगी, जिससे बैलेंस शीट अधिक प्रभावशाली बनेगी.

निवेशकों के लिए शेयर स्वैप का पूरा गणित

एक्सचेंज को दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस मर्जर के लिए शेयर एक्सचेंज रेशियो 88:100 तय किया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपके पास वर्तमान में 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले REC के 100 इक्विटी शेयर हैं, तो इसके बदले आपको 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले ही PFC के 88 पूर्ण चुकता (फुली पेड-अप) इक्विटी शेयर दिए जाएंगे. हालांकि, मर्जर योजना के लिए शेयरधारकों की पात्रता तय करने हेतु अभी रिकॉर्ड डेट का ऐलान नहीं किया गया है. इस पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले शेयरधारकों, स्टॉक एक्सचेंजों, बाजार नियामक सेबी (SEBI) तथा नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) सहित अन्य वैधानिक प्राधिकरणों से मंजूरी लेनी होगी.

कहां मिलेगा ज्यादा मुनाफा

पोर्टफोलियो में कौन सा शेयर शामिल किया जाए, इसे लेकर INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी ने स्थिति साफ की है. उनके अनुसार, यह विलय रणनीतिक लिहाज से बेहद मजबूत है. नई कंपनी को पावर सेक्टर के मौजूदा कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) साइकिल का जबरदस्त फायदा मिलेगा. इसमें रिन्यूएबल एनर्जी फाइनेंसिंग, ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार तथा डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े सुधार शामिल हैं. दासानी का मानना है कि जो निवेशक पहले से इन कंपनियों के शेयर होल्ड कर रहे हैं, उन्हें मौजूदा बाजार भाव तथा शेयर स्वैप रेशियो के बीच के अंतर (आर्बिट्रेज) को समझना चाहिए. गणितीय रूप से जिस शेयर में अधिक वैल्यू दिखे, उसे होल्ड करना एक समझदारी भरा कदम होगा.

पीएफसी को माना जा रहा है बेहतर

ताजा निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए विशेषज्ञ का स्पष्ट नजरिया है. दासानी का कहना है कि पीएफसी (PFC) तथा आरईसी (REC) में से पीएफसी निवेश के लिए एक ज्यादा साफ विकल्प नजर आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पीएफसी इस विलय में मूल (पैरेंट) कंपनी है तथा कंसोलिडेशन की पूरी प्रक्रिया में एक एंकर की भूमिका निभा रही है. उनका कहना है कि बाजार ने पावर कैपेक्स, ट्रांसमिशन तथा राज्य बिजली कंपनियों की सुधरती स्थिति को शेयर की मौजूदा कीमत में पहले ही काफी हद तक शामिल कर लिया है, फिर भी पीएफसी का मजबूत बिजनेस मॉडल इसे भविष्य के लिए एक सुरक्षित दांव बनाता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.