Jain Saint Acharya Lokesh: कौन हैं जैन संत आचार्य लोकेश? जिन्हें मिला खामेनेई के जनाजे में शामिल होने का न्योता
TV9 Bharatvarsh July 01, 2026 03:43 PM

Who is Jain Saint Acharya Lokesh: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के निधन के 4 महीने बाद वहां के अधिकारियों ने उनके राजकीय अंतिम संस्कार, शोक जुलूस और दफन समारोहों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है.ईरान की समाचार एजेंसी के अनुसार, खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह 4 और 5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी प्रार्थना स्थल पर आयोजित किए जाएंगे. वैश्विक मंच पर भारत की उपस्थिति को दर्ज कराने के लिए सरकार की तरफ से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस समारोह में शामिल हो रहा है, जिसमें बिहार के गवर्नर सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा का नाम शामिल है. लेकिन इसमें एक नया नाम जुड़ गया है. भारत के जैन संत आचार्य लोकेश मुनि को भी इस राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है. आइए जानते हैं कि कौन हैं आचार्य लोकेश मुनि, जिन्हें वैश्विक मंचों पर शांति और सद्भाव का एक बड़ा चेहरा माना जाता है.

कौन हैं आचार्य डॉ. लोकेश?

आचार्य लोकेश मुनि देश के प्रमुख जैन संत, विचारक, लेखक, कवि और समाज सुधारक हैं. वे पिछले तीन दशक से अधिक समय से अहिंसा, विश्व शांति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. उनका मानना है कि समाज में स्थायी शांति केवल संवाद, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों के जरिए ही स्थापित की जा सकती है. इन्हीं उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अहिंसा विश्व भारती की स्थापना की. यह संस्था देश-विदेश में शांति, अहिंसा, नैतिक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कई अभियान चलाती है.

20 हजार किलोमीटर की पदयात्रा से जगाई सामाजिक चेतना

आचार्य लोकेश ने समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया. बताया जाता है कि उन्होंने लगभग 20 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर लोगों को नशामुक्ति, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, पर्यावरण संरक्षण, नैतिक शिक्षा और सामाजिक एकता का संदेश दिया. उनके अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक उपदेश देना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना रहा है.

शिक्षा और साहित्य में भी गहरी पकड़

आचार्य लोकेश का जन्म 17 अप्रैल 1961 को राजस्थान के पचपदरा में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने जैन, बौद्ध, वैदिक तथा अन्य भारतीय और विदेशी दर्शन का गहन अध्ययन किया. उन्हें संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड़ सहित कई भाषाओं का ज्ञान है. वे एक लेखक भी भी हैं और एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं.

दुनिया के बड़े धार्मिक नेताओं के साथ किया संवाद

आचार्य लोकेश अंतरधार्मिक संवाद के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. उन्हें दुनिया के कई प्रमुख आध्यात्मिक नेताओं के साथ विचार-विमर्श के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है. उनका प्रयास सभी धर्मों के बीच संवाद बढ़ाकर शांति और भाईचारे को मजबूत करना रहा है.

कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से हो चुके हैं सम्मानित

आचार्य लोकेश को उनके सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं. भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार 2010 से सम्मानित किया. इसके अलावा उन्हें लंदन संसद में शांति दूत की उपाधि भी दी गई. विश्व शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मंचों पर भी सम्मानित किया जा चुका है.

क्यों चर्चा में हैं आचार्य लोकेश?

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के निमंत्रण की खबर सामने आने के बाद आचार्य लोकेश एक बार फिर सुर्खियों में हैं. अंतरधार्मिक संवाद और वैश्विक शांति के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित आध्यात्मिक नेताओं में गिना जाता है. यही वजह है कि उनका नाम इस महत्वपूर्ण राजकीय समारोह में भी चर्चा का विषय बना हुआ है.

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