Interest Free Loan: शरिया के हिसाब से चलेगा पाकिस्तान का सिस्टम, वित्त मंत्रालय ने ड्राफ्ट किया तैयार, लोन होगा ब्याज मुक्त
TV9 Bharatvarsh July 01, 2026 03:43 PM

पाकिस्तान का शहबाज सरकार ने देश की वित्तीय व्यवस्था को धीरे-धीरे रिबा यानी ब्याज मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जिसके तहत अब देश का सिस्टम शरिया (इस्लामी कानून के नियमों के मुताबिक) के हिसाब से चलेगा. सरकार ने तय किया है कि 1 जनवरी, 2028 से लोन समेत सभी नए लेन-देन शरिया के अनुरूप किए जाएंगे. हालांकि मौजूदा व्यवस्थाएं अपनी अवधि पूरी होने तक जारी रहेंगी.

सरकार ने फैसला किया है कि 31 दिसंबर 2027 तक वित्तीय प्रणाली में बदलाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और 1 जनवरी 2028 से सभी नए वित्तीय लेनदेन, जिसमें कर्ज और अन्य वित्तीय समझौते शामिल हैं शरिया के अनुरूप किए जाएंगे. ज्यादातर विदेशी स्वामित्व वाले बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों को पारंपरिक और इस्लामी दोनों तरह के तरीकों वाली हाइब्रिड व्यवस्था जारी रखने की अनुमति दी जाएगी.

बातचीत के बाद लिया फैसला

वित्त मंत्रालय ने ट्रांज़िशन (बदलाव) के लिए एक संस्थागत व्यवस्था के ज़रिए स्टेकहोल्डर्स, रेगुलेटर्स, बैंकों, फाइनेंशियल संस्थानों और धार्मिक विद्वानों के साथ बातचीत करके पाकिस्तान में 2027 के बाद के फाइनेंशियल सिस्टम के लिए रणनीति को अंतिम रूप दिया है.

पाकिस्तान में रिबा मुक्त वित्तीय व्यवस्था लागू करने की रणनीति फ़ेडरल शरीयत कोर्ट के 28 अप्रैल, 2022 के फ़ैसले को ध्यान में रखकर बनाई गई है. इस फैसले में कहा गया था कि रिबा (ब्याज) अपने सभी रूपों और तरीकों में पूरी तरह से प्रतिबंधित है और इसे 31 दिसंबर 2027 तक पाकिस्तान से खत्म करना जरूरी है. इसके बाद संविधान में 2024 में किए गए 26वें संशोधन में भी यह समयसीमा तय की गई और 1 जनवरी 2028 से पहले रिबा व्यवस्था को समाप्त करने की योजना बनाई गई. वित्त मंत्रालय ने हितधारकों, नियामकों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और धार्मिक विद्वानों से बातचीत की उसके बाद यह ट्रांजिशन प्लान बनाया है. ताकि बदलाव की प्रक्रिया व्यावहारिक और प्रभावी बनाई जा सके.

कैसे होगा ट्रांजिशन?

वित्त मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ यह बदलाव बिना किसी बड़े परेशानी के सुचारू रूप से होगा. रणनीति में 2027 के बाद वित्तीय व्यवस्था का खाका, प्रमुख जोखिम, माइलस्टोन और अलग-अलग हितधारकों की भूमिकाएं तय की गई हैं.

नया लोन सिर्फ शरिया आधारित: 1 जनवरी 2028 से सरकार, बैंक और वित्तीय संस्थान सभी नए लोन और फाइनेंसिंग शरिया-आधारित तरीकों से देंगे.

पुराने करार रहेंगे बरकरार: दिसंबर 2027 तक ली गई पारंपरिक फाइनेंसिंग सहित सभी कमिटमेंट्स और दायित्वों को कॉन्ट्रैक्ट के तहत किए गए वादों के अनुसार पूरा किया जाएगा और उनका भुगतान किया जाएगा. 31 दिसंबर 2027 तक बकाया पारंपरिक कर्ज़ को उनकी मैच्योरिटी की तारीखों पर शरिया-कम्प्लायंट फाइनेंसिंग में बदल दिया जाएगा. इससे निवेशकों का भरोसा बना रहेगा.

हाइब्रिड सिस्टम की छूट: जिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों में बहुमत हिस्सेदारी विदेशी है, उन्हें पारंपरिक और इस्लामिक दोनों तरह के प्रोडक्ट देने की अनुमति होगी. लेकिन घरेलू स्वामित्व वाले संस्थानों को पूरी तरह शरिया सिस्टम में बदलना होगा.

घरेलू और विदेशी बैंकों के लिए अलग-अलग व्यवस्था

सरकार ने घरेलू और विदेशी बैंकों के लिए अलग-अलग व्यवस्था तय की है. ज्यादातर घरेलू स्वामित्व वाले वित्तीय संस्थानों को पूरी तरह शरिया आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. वहीं ज्यादातर विदेशी स्वामित्व वाले बैंक और वित्तीय संस्थान हाइब्रिड मॉडल अपना सकेंगे. यानी वो इस्लामिक बैंकिंग और पारंपरिक बैंकिंग दोनों तरह की सेवाएं जारी रख पाएंगे. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बना रहेगा और वित्तीय बाजार में अचानक बदलाव का असर नहीं पड़ेगा.

12 महीने में तैयार होगा फ्रेमवर्क

अगले 12 महीनों में कानूनी, टैक्स, रेगुलेटरी और सुपरवाइजरी फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा. साथ ही शरिया-अनुरूप लिक्विडिटी मैनेजमेंट इंस्ट्रूमेंट्स भी नियमित अंतराल पर उपलब्ध कराए जाएंगे. अब तक इन इंस्ट्रूमेंट्स की कमी ही बैंकों के लिए इस्लामिक बैंकिंग में बदलने की सबसे बड़ी चुनौती रही है.इसके लिए सरकार शरिया आधारित सिक्योरिटीज यानी सुकुक बाजार को मजबूत करने की योजना बना रही है.

2027 के बाद संघीय और राज्य सरकारें घरेलू और विदेशी स्रोतों से सभी नई फंडिंग शरिया-आधारित तरीकों से जुटाने की कोशिश करेंगी. इसके लिए दिसंबर 2027 तक सभी इंतजाम पूरे कर लिए जाएंगे. सरकार अलग-अलग अवधि वाले सिक्योरिटीज यानी सुकुक जारी करेगी, जिनमें 3 महीने, 6 महीने और 12 महीने जैसी छोटी अवधि के विकल्प भी शामिल होंगे. ताकि वित्तीय संस्थानों को लिक्विडिटी मैनेज करने में आसानी हो. पारंपरिक बैंक भी लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए शरिया-अनुरूप सिक्योरिटीज का इस्तेमाल कर सकेंगे, मौजूदा पारंपरिक सिक्योरिटीज भी लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए मान्य रहेंगी.

सबसे बड़ी चुनौती

रणनीति में माना गया है कि सबसे बड़ी चुनौती दिसंबर 2027 तक बकाया पारंपरिक सरकारी कर्ज को शरिया-अनुरूप कर्ज में बदलना है. सरकार मेच्योरिटी के बाद बकाया कर्ज को शरिया फाइनेंसिंग से बदलेगी, लेकिन 2027 के बाद मेच्योर होने वाले पारंपरिक कर्ज को अनुबंध के मुताबिक ही चुकाया जाएगा.

बनेगी एसेट रजिस्ट्री कंपनी

सुकुक जारी करने के लिए सरकार एक एसेट रजिस्टर सिस्टम बनाएगी. इसके लिए वित्त प्रभाग के तहत पूरी तरह सरकारी स्वामित्व वाली ‘एसेट रजिस्ट्री कंपनी’ स्थापित होगी. यह कंपनी संघीय सरकार और उसकी संस्थाओं की गैर-चालू संपत्तियों का रिकॉर्ड रखेगी. इससे सुकुक जारी करने के लिए एसेट्स का एक पूल बनेगा.

रजिस्टर में हर संपत्ति का मालिकाना हक, प्रकृति, आकार, स्थान, बुक वैल्यू, बाजार मूल्य और भारमुक्त मूल्य जैसी जानकारी होगी. हालांकि कंपनी को सौंपी गई संपत्तियां सरकारी इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगी और संस्थाओं की बैलेंस शीट में भी दिखेंगी. बस यह खुलासा करना होगा कि संपत्ति सुकुक के लिए कंपनी को सौंपी गई है. एसबीपी की शरिया सलाहकार समिति इस ढांचे को मंजूरी दे चुकी है. कैबिनेट से जल्द ही कंपनी बनाने और संपत्तियां सौंपने की मंजूरी ली जाएगी.

इस पूरी कवायद का मकसद 2027 के बाद वित्तीय व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता खत्म करना और रिबा-मुक्त सिस्टम में बदलाव को सहज बनाना है. सरकार का कहना है कि ट्रांजिशन के दौरान और बाद में भी घरेलू-विदेशी भागीदारों के प्रति सभी मौजूदा प्रतिबद्धताएं अनुबंध के मुताबिक निभाई जाएंगी.

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