भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (JLNMCH) के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टरों ने डिप्रेशन से जूझ रही पूर्णिया की एक युवती के इलाज में एक अनोखा तरीका अपनाकर सफलता हासिल की है. डॉक्टरों का दावा है कि मात्र 6 से 8 रुपये की दवा और विदेशी शोध से प्रेरित तकनीक की मदद से युवती की मानसिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ. अब युवती ने खुद कहा है कि वह आत्महत्या नहीं करेगी, बल्कि नई जिंदगी जीना चाहती है.
डॉक्टरों के मुताबिक, युवती लंबे समय से गंभीर अवसाद से पीड़ित थी और कई बार अपनी जान लेने की कोशिश भी कर चुकी थी. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वह किसी भी तरह की दवा लेने से साफ इनकार कर देती थी. ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने विदेशी मेडिकल रिसर्च का अध्ययन किया और एक वैकल्पिक तरीका अपनाया.
इलाज के तहत इंजेक्शन की दवा को जूस में मिलाकर मरीज को दिया गया. धीरे-धीरे दवा का असर दिखने लगा और उसकी मानसिक स्थिति में सुधार आने लगा.
डॉक्टरों ने बताया कि बीमारी के कारण युवती का वजन घटकर करीब 25 किलोग्राम रह गया था. लेकिन उपचार के बाद उसका वजन बढ़ने लगा और स्वास्थ्य में लगातार सुधार दर्ज किया गया. फिलहाल उसे नियमित अंतराल पर दवा दी जा रही है और उसकी स्थिति पहले से काफी बेहतर है.
मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुमार गौरव के नेतृत्व में की गई इस पहल को भागलपुर में बढ़ते अवसाद और आत्महत्या के मामलों के बीच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
रिसर्च टीम में शामिल डॉ. सिंपल ने बताया कि जब मरीज ने दवा लेने से मना कर दिया था, तब यह वैकल्पिक तरीका अपनाया गया. बाद में जब मरीज ने सामान्य रूप से दवा लेना शुरू किया, तो ओरल दवाओं की मात्रा बढ़ाई गई. डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज, सही रणनीति और लगातार निगरानी से गंभीर अवसाद के मरीजों को भी सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सकता है.