EV Sales: लगातार बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दामों के चलते इलेक्ट्रिक गाड़ियों का क्रेज भारत में बहुत तेजी से बढ़ा था और अभी भी लोग इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदना पसंद कर रहे हैं. अगर देखा जाये तो पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री में भारी उछाल देखा गया था. हालांकि, अब इसकी बाजार में थोड़ी धीमी पड़ती नजर आ रही है.
क्योंकि, अभी हाल ही में एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ईवी की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही हैं. इसमें किसी बड़ी तकनीकी कमी की नहीं है बल्कि हमारे घरों के कमजोर इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और होम चार्जिंग की जगह न होने की वजह इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री कम हो रही हैं.
आपको बता दें कि, भारत में होने वाली ईवी बिक्री में से लगभग 91 परसेंट हिस्सेदारी दोपहिया और तिपहिया वाहनों की है. जिनके लिए घर पर होम चार्जिंग सबसे जरूरी है. लेकिन रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में ईवी खरीदने की चाह रखने वाले ग्राहकों में से केवल 55 फीसदी लोगों के पास ही फिलहाल घर पर गाड़ी चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध है.
बाकी के बचे हुए लोगों को अपनी गाड़ी चार्ज करने के लिए या तो पब्लिक स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. होम चार्जिंग का यह बड़ा गैप अब नए खरीदारों को ईवी खरीदने से रोक रहा है.
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इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड शहरी छेत्रों में ज्यादा है लेकिन अपार्टमेंट्स, सोसाइटी और किराए के मकानो में रहने वाले 70 से 75 परसेंट शहरी परिवारों के लिए मुश्किलें और भी ज्यादा हैं. इन जगहों पर साझा पार्किंग स्पेस होता है. जहां अपना पर्सनल चार्जर लगाना बेहद मुश्किल काम है. चार्जर इंस्टॉल करने के लिए मकान मालिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWA) से मंजूरी या एनओसी लेनी पड़ती है.
जो अक्सर एक लंबी बहस और कागजी कार्रवाई में बदल जाती है. इसके अलावा बिजली कंपनियों से मीटर का लोड बढ़वाना भी आम लोगों के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं होता जिससे लोग परेशान होकर ईवी का प्लान छोड़ दे रहे हैं.
इलेक्ट्रिक वाहन के लिए घर पर सही सेटअप न होने के कारण कई लोग मजबूरी में जुगाड़ का सहारा ले रहे हैं. लोग अपनी बालकनी या खिड़की से लंबी एक्सटेंशन बोर्ड लटकाकर या किसी सॉकेट्स में भारी लोड वाली ईवी को लगा दे रहे हैं. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साधारण सॉकेट्स लगातार कई घंटों तक ईवी का भारी लोड संभालने के लिए नहीं बने होते.
इस वजह से तारों के पिघलने, आग लगने और वोल्टेज फ्लक्चुएशन का खतरा बहुत बढ़ जाता है. यह लापरवाही न सिर्फ घर की सुरक्षा को खतरे में डालती है, बल्कि गाड़ी की महंगी बैटरी को भी हमेशा के लिए डैमेज कर सकती है. इन सभी कारणों के चलते इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को नहीं मिल रही है.
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