Adoor Gopalakrishnan Birthday: साउथ फिल्म इंडस्ट्री आज खूब ग्रो कर रही है और इस इंडस्ट्री के एक से बढ़कर एक रिकॉर्ड्स देखने को मिल रहे हैं. साउथ इंडस्ट्री अगर अब एक विश्वस्तरीय सिनेमा है तो इसके पीछे कई रिवॉल्युशनरी कलाकारों की अपनी भूमिकाएं रही हैं. ऐसे ही एक फिल्म निर्देशक हैं अदूर गोपालकृष्णन. अदूर ने फिल्म इंडस्ट्री में लंबा वक्त तय किया है लेकिन उन्होंने बेहद कम फिल्में ही बनाई हैं. इन फिल्मों के जरिए ही लेकिन उन्होंने दुनियाभर में ख्याति हासिल की है. अदूर गोपालकृष्णन के कद का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उन्होंने 12 फिल्में बनाई हैं और इतने में ही उन्होंने 16 नेशनल अवॉर्ड्स भी अपने नाम कर के दिखाए हैं.
अदूर ने अपने करियर की शुरुआत एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर की थी. वे भारत सरकार के नेशनल सैंपल सर्विस ऑफिस में स्टेटस्टिकल इनवेस्टिगेटर की भूमिका में कार्यरत थे. ऐसे में भला कौन सोच सकता था कि ये शख्स आने वाले समय में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े डायरेक्टर्स में गिना जाएगा. अदूर के 85वें जन्मदिन पर आइये जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें.
पहली ही फिल्म से अदूर ने दुनियाभर में कमाया नामऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि कोई कलाकार आते ही सिर्फ अपनी पहचान ना बनाए बल्कि पूरी की पूरी इंडस्ट्री ही उसके नाम और काम की वजह से जाने जानी लगे. लेकिन अदूर गोपालकृष्णन का कद इतना बड़ा था कि उनके इंडस्ट्री में कदम रखते ही मलयालम फिल्म जगत की किस्मत ही पलट गई. उनकी पहली फिल्म स्वयंवरम साल 1972 में आई थी. इस फिल्म को भारत में तो पसंद किया ही गया था साथ में फिल्म ने विदेशों में भी अपनी छाप छोड़ी थी और उस साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही थी. इस फिल्म के लिए अदूर को नेशनल अवॉर्ड तो मिला था. लेकिन इसके अलावा फिल्म को मॉस्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, पेरिस फिल्म फेस्टिवल, मेलबर्न फिल्म फेस्टिवल और लंदन फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था.
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12 फिल्में और 16 नेशनल अवॉर्ड्सअदूर गोपालकृष्णन ने अपने करियर में ज्यादा काम नहीं किया. उन्होंने सिर्फ 12 फिल्में ही बनाईं जिसमें कोदियेत्तम, एलिप्पथयम, मुखामुखम, अनंतरम, विधेयन और पिन्नेयम जैसी फिल्में शामिल हैं. अदूर को बेस्ट फीचर फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्क्रीनप्ले समेत बेस्ट बुक ऑन सिनेमा के लिए भी नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया. वहीं उन्होंने 17 केरल स्टेट अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए. डायरेक्टर को दादासाहेब फाल्के सम्मान, पद्मश्री और पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से नवाजा जा चुका है. साल 2016 में उन्होंने अपनी पिछली फिल्म बनाई थी और अब 10 सालों के बाद वे वापसी के लिए भी तैयार हैं. वे पदयात्रा नाम की फिल्म पर काम कर रहे हैं.