जून में भी भारत को सबसे अधिक एलपीजी सप्लाई करने वाला देश बना अमेरिका
Indias News Hindi July 03, 2026 06:42 PM

New Delhi, 3 जुलाई . अमेरिका जून में भी India को द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश बना रहा. पश्चिम एशिया में भू-Political अनिश्चितताओं के बीच India ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है, जिसके चलते अमेरिका ने पारंपरिक खाड़ी देशों पर अपनी बढ़त और मजबूत कर ली है.

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून में India ने अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन (773.78 टीएमटी) एलपीजी आयात की, जो मई की तुलना में 19.4 प्रतिशत अधिक है. वहीं, जून के दौरान India का कुल एलपीजी आयात 3 प्रतिशत बढ़कर 11.91 लाख मीट्रिक टन (1,191 टीएमटी) हो गया, जबकि मई में यह 11.55 लाख मीट्रिक टन (1,155 टीएमटी) था.

जून में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) India का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहा, जहां से आयात 16.6 प्रतिशत बढ़कर 1.57 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया, जो मई में 1.34 लाख मीट्रिक टन था. वहीं, सऊदी अरब और कुवैत ने जून में India को 64-64 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की.

अमेरिका से एलपीजी आयात में लगातार बढ़ोतरी India की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के बाद ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को विविध बनाया जा रहा है. इसी दिशा में सरकारी तेल रिफाइनरियों ने 2026 से अमेरिका से 22 लाख टन एलपीजी आयात करने के लिए दीर्घकालिक समझौता भी किया है, जिससे भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग और मजबूत होगा तथा खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, India ने अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी दोनों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलने के बाद खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने लगी है, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं.

ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए India अब केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ओमान, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ा रहा है.

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले India के करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात का रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता था. इससे स्पष्ट होता है कि India की ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर थी. हालांकि संघर्ष के दौरान आपूर्ति में आई बाधाओं के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने आयात के स्रोतों का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया, ताकि भविष्य में किसी भी भू-Political संकट का असर कम किया जा सके.

विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के बाद भी India अपनी ऊर्जा आयात विविधीकरण की नीति जारी रखेगा. हालांकि खाड़ी देश आगे भी कच्चे तेल और एलपीजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे, लेकिन भारतीय रिफाइनरियां अब कई देशों से आयात का संतुलित मिश्रण बनाए रखेंगी, जिससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थिर बनी रहे.

डीबीपी

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