चाइनिज ऐप की हैकिंग से अपने ई-रिक्शा को कैसे बचा सकते हैं? 5 प्वाइंट्स में समझिए
TV9 Bharatvarsh July 03, 2026 06:43 PM

देश में ई-रिक्शा चालकों के लिए राहत वाली खबर सामने आई है. भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने तीन मोबाइल ऐप BAT-BMS, Lossigy और Epoch Li-ion को इंटरनेट और ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है. इन ऐप की मदद से सड़क पर चलते ई-रिक्शा को बंद किया जा रहा था. हाल ही में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हुए थे जिनमें दिखाया गया कि चलते हुए ई-रिक्शा को कुछ लोग मोबाइल ऐप से दूर बैठकर बंद कर दे रहे थे. जांच में पता चला कि इन ऐप्स का गलत इस्तेमाल करके ई-रिक्शा को बिना छुए रोक दिया जा रहा था. सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए इन ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है. चलिए समझते हैं कि इस तरह के ऐप से ई-रिक्शा ड्राइवर खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं और क्या बैन होने के बाद भी यह ऐप डाउनलोडेड डिवाइस में काम करते रहेंगे.

कैसे काम करते थे ये ऐप?

ये तीनों ऐप असल में बैटरी को मॉनिटर करने के लिए बनाए गए थे. इन्हें बैटरी कंपनियां इस लिए बनाती हैं ताकि यूजर अपनी बैटरी का वोल्टेज, तापमान और उसकी स्थिति देख सके. लेकिन इन ऐप्स में एक ऐसा फीचर था जिससे बैटरी को ऑन और ऑफ किया जा सकता था. यही फीचर खतरे की वजह बन गया. कुछ लोग इन ऐप्स को डाउनलोड करके सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा के पास 15 मीटर के दायरे में आकर ब्लूटूथ से कनेक्ट कर लेते थे. इसके बाद वे बैटरी की पावर सप्लाई बंद कर देते थे, जिससे ई-रिक्शा अचानक रुक जाता था. कई मामलों में ऐसा भी हुआ कि पहले गाड़ी रोककर बाद में उसे ठीक करने के नाम पर ड्राइवर से 200 से 300 रुपये तक वसूले गए.

ई-रिक्शा ड्राइवर खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

सरकार ने BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion ऐप्स को तुरंत गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है. लेकिन यदि पहले से किसी के फोन में ये ऐप डाउनलोड है तो ई-रिक्शा ड्राइवर खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं. भारत में ज्यादातर सस्ते ई-रिक्शा में कम कीमत वाले बैटरी सिस्टम लगे होते हैं. इनमें सुरक्षा बहुत कमजोर होती है और ब्लूटूथ बिना पासवर्ड के खुला रहता है. इसी कारण यह समस्या हुई. इससे बचने के लिए ड्राइवर अपने बैटरी ऐप में जाकर पासवर्ड या पिन सेट कर सकते हैं. अगर यह सुविधा नहीं है तो किसी अच्छे मैकेनिक से बैटरी वायरिंग में बदलाव करवाकर एक फिजिकल बाईपास स्विच लगवाया जा सकता है. इससे ऐप का कंट्रोल खत्म हो जाता है. एक और तरीका यह है कि बैटरी के अंदर लगे ब्लूटूथ एंटीना को बंद या हटवा दिया जाए ताकि कोई बाहर से कनेक्ट न कर सके. लंबे समय के लिए सबसे अच्छा समाधान है कि सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड बैटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए.

पासवर्ड या पिन कैसे सेट करें?
  • अपने फोन में बैटरी का आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें.
  • बैटरी का आधिकारिक ऐप खोलें.
  • सेटिंग्स में जाएं.
  • ब्लूटूथ पासवर्ड/पिन का विकल्प चुनें.
  • नया मजबूत पासवर्ड या पिन सेट करें.
  • बदलाव सेव करें.
पहले से ऐप डाउनलोड कर रखा है तब क्या होगा?

सरकार ने इन ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर से हटा दिया है, जिससे अब कोई नया यूजर इन्हें डाउनलोड नहीं कर सकता. लेकिन जिन लोगों ने पहले ही इन्हें अपने फोन में डाउनलोड कर रखा है, उनके फोन से यह ऐप खुद डिलीट नहीं होगी. इसका मतलब है कि पहले से मौजूद ऐप का गलत इस्तेमाल अभी भी किया जा सकता है. सरकार अब इस पर काम कर रही है कि तकनीकी तरीके से इन ऐप्स को पूरी तरह बंद या निष्क्रिय किया जा सके. जब तक यह व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक सुरक्षा की जिम्मेदारी ड्राइवर और वाहन मालिकों पर ही है.

क्या आपकी इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर पर भी है खतरा?

इस मामले से आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. एथर, ओला, टीवीएस, बजाज, टाटा, एमजी और महिंद्रा जैसे बड़े ब्रांड के इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह सुरक्षित हैं. इन वाहनों में मजबूत और एन्क्रिप्टेड बैटरी सिस्टम होता है जो गाड़ी के मुख्य कंप्यूटर से जुड़ा रहता है. इन्हें कोई सामान्य मोबाइल ऐप या ब्लूटूथ कनेक्शन से कंट्रोल नहीं किया जा सकता. यह समस्या सिर्फ सस्ते, लोकल और बिना ब्रांड वाले ई-रिक्शा या असेंबल किए गए वाहनों में देखी गई है जहां कमजोर बैटरी सिस्टम लगाया जाता है.

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