निकाह हलाला एक बार फिर चर्चा में है. इसकी वजह इलाहाबाद हाई कोर्ट का हालिया फैसला है, जिसमें अदालत ने साफ कहा कि अगर किसी महिला के साथ निकाह हलाला के नाम पर अपराध होता है, तो उसे सिर्फ धार्मिक प्रथा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि पॉक्सो (POCSO) और भारतीय आपराधिक कानून जैसे कानून किसी भी पर्सनल लॉ से ऊपर हैं. ऐसे मामलों में अगर रेप, गैंगरेप, यौन शोषण या नाबालिग से जुड़ा अपराध सामने आता है, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी. इस फैसले के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर निकाह हलाला को लेकर अब तक अदालतों ने क्या-क्या कहा है? क्योंकि पिछले कुछ सालों में कई मुस्लिम महिलाओं ने इस प्रथा को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
निकाह हलाला की बात की जाए, तो इसको लेकर भारत में लंबे समय से बहस चल रही है. समर्थकों का कहना है कि यह इस्लामी कानून का हिस्सा है, जबकि विरोध करने वाले इसे महिलाओं के सम्मान और मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताते हैं. कई महिलाओं ने अदालत में याचिका देकर दावा किया कि कुछ जगहों पर हलाला के नाम पर महिलाओं का शोषण किया जाता है और उन्हें जबरन दूसरे व्यक्ति से शादी और शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है. इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट से लेकर अलग-अलग हाई कोर्ट तक कई मामले पहुंचे. हालांकि, अब तक सुप्रीम कोर्ट ने निकाह हलाला की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है.
एक नजर में पूरा मामलानिकाह हलाला पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आया, जब सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का मामला चल रहा था. अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया. हालांकि, उस फैसले में अदालत ने साफ किया कि निकाह हलाला और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर वह कोई फैसला नहीं दे रही है. इसके बाद इन दोनों विषयों पर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गईं. अब एक पुराने मामले के सामने आने के बाद से इस पर दोबारा चर्चा शुरू हो गई है.
सुप्रीम कोर्ट में फैसला बाकी हैसाल 2022 में कई मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला और बहुविवाह को चुनौती दी. उनका कहना था कि ये प्रथाएं महिलाओं के समानता, गरिमा और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन करती हैं. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कई मामलों में हलाला के नाम पर महिलाओं का शोषण होता है. इस पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई शुरू की और केंद्र सरकार के साथ राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) से जवाब मांगा. हालांकि, अदालत ने निकाह हलाला को न तो वैध और न ही अवैध घोषित किया. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला अभी भी आना बाकी है.
निकाह हलाला मामला (Getty Image)
उत्तराखंड में पहली एफआईआरउत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद निकाह हलाला से जुड़ा पहला मामला दर्ज हुआ. हरिद्वार की एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, तीन तलाक और निकाह हलाला के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया. महिला का कहना था कि पति ने उसे दोबारा साथ रखने के लिए पहले हलाला करने को कहा. शिकायत के बाद पुलिस ने पति और अन्य आरोपियों के खिलाफ UCC, भारतीय न्याय संहिता (BNS), दहेज निषेध कानून और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया. यह उत्तराखंड में UCC के तहत निकाह हलाला के आरोपों पर दर्ज पहला मामला माना जा रहा है.
क्या है हालिया मामला?हालिया मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने आया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा की एक महिला से जुड़ा था. महिला ने आरोप लगाया कि उसकी शादी कम उम्र में हुई, बाद में उसे तीन तलाक दे दिया गया. इसके बाद निकाह हलाला के नाम पर उसकी दूसरी शादी कराई गई, जहां उसके साथ रेप हुआ. बाद में दोबारा हलाला के बहाने उसके साथ गैंगरेप किए जाने का भी आरोप लगाया गया. आरोपियों ने एफआईआर रद्द करने की मांग की, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि यदि हलाला की आड़ में रेप, गैंगरेप या नाबालिग के साथ यौन शोषण जैसे अपराध होते हैं, तो उन पर पॉक्सो (POCSO) और आपराधिक कानून लागू होंगे. पर्सनल लॉ या धार्मिक प्रथा का हवाला देकर ऐसे अपराधों से बचा नहीं जा सकता. हालांकि, कोर्ट ने निकाह हलाला की संवैधानिक वैधता पर कोई फैसला नहीं दिया.
क्या होता है निकाह हलाला? (Getty Image)
क्या है निकाह हलाला?निकाह हलाला एक ऐसी धार्मिक प्रथा है, जिसे कुछ मुस्लिम समुदाय मानते हैं. इसके अनुसार, अगर कोई पति अपनी पत्नी को तीन तलाक दे देता है और बाद में उसी से दोबारा शादी करना चाहता है, तो महिला पहले किसी दूसरे पुरुष से शादी करेगी. उस शादी में पति-पत्नी का शारीरिक संबंध बनने के बाद, अगर किसी वजह से दूसरा पति उसे तलाक दे दे या उसकी मौत हो जाए, तभी महिला अपने पहले पति से दोबारा निकाह कर सकती है. हालांकि, हलाला के नाम पर जबरदस्ती या शोषण के कई आरोप सामने आए हैं. इसी वजह से इसकी संवैधानिक वैधता का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.